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श्रुतिसमभिन्नार्थक शब्द (Homophones Words) By Avinash Ranjan Gupta

  श्रुतिसमभिन्नार्थक शब्द ( Homo phones Words) श्रुतिसमभिन्नार्थक शब्दों के अध्ययन की अनिवार्यता यद्यपि बहु नाधीषे तथापि पठ पुत्र! व्याकरणम् । स्वजनः श्वजनो मा भूत् सकलं शकलं सकृच्छकृत् ॥ हे पुत्र! यद्यपि तुमने बहुत अधिक नहीं पढ़ा है , फिर भी श्रुतिसमभिन्नार्थक (अवश्य) पढ़ो ; जिससे कि (तुम्हारे द्वारा उच्चारण किए जाने वाले शब्दों में) ‘ स्वजन ’ ( आत्मीय जन) के स्थान पर ‘ श्वजन ’ ( श्वान) , ‘ सकल ’ ( संपूर्ण) के स्थान पर ' शकल ' ( अंश) एवं ' सकृत् ' ( एक बार) के स्थान पर ‘ शकृत् ’ ( विष्ठा) न हो।   श्रुतिसमभिन्नार्थक शब्द का विखंडन श्रुति + सम + भिन्न + अर्थ + क श्रुतिसमभिन्नार्थक शब्द के अन्य नाम इसे समोच्चरित शब्द या समश्रुतिभिन्नार्थक शब्द के नाम से भी जाना जाता है।   श्रुतिसमभिन्नार्थक शब्द की परिभाषा हिंदी भाषा की एक विशेषता यह है कि यह- मात्रा , वर्ण , उच्चारण प्रधान भाषा है। इसमें शब्दों की मात्राओं अथवा वर्णों में परिवर्तन करने से काफी अंतर आ जाता है। अतएव , उच्चारण की दृष्टि से असमान होते हुए भी समान होने का भ्रम पैदा करते हैं , वही

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