Informal Letter Anoupcharik Patra By Avinash Ranjan Gupta



पिता से रुपए मँगवाने के लिए पत्र

12 जनवरी, 2016
जवाहर नवोदय विद्यालय
पालीझर, बौद्ध
ओडिशा  

पूज्य पिताजी,
सादर चरण स्पर्श!

          आपकी नसीहत और प्यार भरा पत्र 4 जनवरी को प्राप्त हुआ था। सभी समाचार ज्ञात हुए। पत्र का उत्तर शीघ्र न दे सका इसलिए क्षमा करें। मैं अपनी कक्षा  के छात्रों के साथ कश्मीर के ऐतिहासिक पर्यटन पर चला गया था। आपको यह जानकर अवश्य प्रसन्नता होगी कि मैंने कश्मीर घाटी के सभी सुंदर, प्राचीन और आकर्षक  दृश्य देखे साथ ही साथ मेरे इतिहास के ज्ञान का भी संवर्धन हुआ। इनका वर्णन मैं अगले पत्र में करूँगा। पर्यटन पर जाने के कारण आपके भेजे हुए पैसे समाप्त हो गए हैं। कृपया और रुपए भेजने का कष्ट करें।
          पूज्य माताजी को चरण स्पर्श और छोटी को ढेर सारा प्यार । शेष अगले पत्र में।
आपका आज्ञाकारी पुत्र
उमेश
                                                                                                               



जन्मोत्सव में निमंत्रण के लिए दादाजी को पत्र

12 जनवरी, 2016
कमरा संख्या W-245
पालीझर, बौद्ध
ओडिशा  

आदरणीय दादाजी,
सादर चरण स्पर्श!

          हमलोग यहाँ सकुशल हैं और आशा करते हैं कि आप सभी वहाँ कुशलपूर्वक होंगे। आप यह जानकर प्रसन्न होंगे कि मेरा जन्मदिवस 27 नवंबर को मनाया जाएगा। मेरी हार्दिक इच्छा है कि आप सभी इस दिन आकर जन्मोत्सव में सम्मिलित हों। उस दिन जलपान आदि के पश्चात लगभग 8 बजे से सांस्कृतिक कार्यक्रम भी रखा गया है जिसमें नन्हें-मुन्नों के नृत्य, गायन, प्रहसन आदि होंगे। इसके बाद बड़ों के द्वारा संगीत और कवि-सम्मेलन का अति सुंदर कार्यक्रम होगा। आशा है आप अवश्य ही इसमें सम्मिलित होंगे।
          आदरणीय दादीजी,चाचा-चचीजी को सादर चरण स्पर्श और मेरे छोटे-बड़े भाई-बहनों को ढेर सारा प्यार।
आपका आज्ञाकारी पौत्र
उमेश
        



जन्मदिन के उपहार का धन्यवाद करते हुए मित्र को पत्र

12 जनवरी, 2016
कमरा संख्या W-245
पालीझर, बौद्ध
ओडिशा  

प्रिय मित्र राजू,
नमस्कार।
          यहाँ पर हम सभी लोग कुशल से हैं और आशा करता हूँ कि तुम भी अपने परिवार के साथ सकुशल होगे। मित्र! परसों मेरी बारहवीं वर्षगाँठ थी। इस अवसर पर मेरे पापा ने सभी सगे-संबंधियों तथा मित्रों को भी आमंत्रित किया था। मित्र! इस शुभ अवसर पर तुम्हारे सिवा प्रायः सभी लोग आए थे। हम सभी तुम्हें बार-बार याद कर रहे थे। जन्मदिन का उत्सव खूब ज़ोर-शोर से चल रहा था, तभी अचानक कूरियर वाले की आवाज आई। मैं निकलकर बाहर आया तो उसने मुझसे हस्ताक्षर कराकर एक छोटा-सा पार्सल दिया। मैंने जैसे ही उस पार्सल को खोला तो उसमें से एक सुंदर-सी घड़ी निकली, जिसे तुमने उपहार स्वरूप भेजा था।

          प्रिय मित्र! मैं इस सुंदर उपहार के लिए तुम्हें हार्दिक धन्यवाद देता हूँ। मैं तुम्हारे द्वारा भेजे गए इस उपहार का सदुपयोग करूँगा और इससे पूरा-पूरा लाभ उठाऊँगा। अच्छा अब पत्र समाप्त करता हूँ। शेष शुभ।
तुम्हारा प्रिय मित्र 
उमेश



कक्षा में प्रथम आने की सूचना देते हुए पिताजी को पत्र

12 जनवरी, 2016
जवाहर नवोदय विद्यालय
पालीझर, बौद्ध
ओडिशा  

परम पूज्य पिताजी,
सादर चरण स्पर्श!

          मैं यहाँ कुशलपूर्वक हूँ और आशा करता हूँ कि आप लोग भी वहाँ कुशलपूर्वक होंगे। पिताजी! नवम्बर में हमारी अर्द्धवार्षिक परीक्षाएँ थीं। मैंने सभी विषयों में सर्वाधिक अंक प्राप्त किए। गणित, हिंदी, कंप्यूटर तथा विज्ञान में तो मैंने विशेष योगयता प्राप्त की थी। पिताजी मैं अपनी कक्षा में प्रथम स्थान पर रहा, जिससे मेरे प्रधानाचार्य तथा सभी अध्यापक-अध्यापिकाओं ने मेरी बहुत प्रशंसा की। मेरे सभी सहपाठियों ने भी मुझे प्रथम आने के लिए बधाई दी। आशा है आप तथा परिवार के सभी सदस्य मेरी इस सफलता पर बहुत प्रसन्न होंगे।
         
          अच्छा अब पत्र समाप्त करता हूँ। माताजी को चरण स्पर्श कहिएगा। शेष शुभ।

आपका आज्ञाकारी पुत्र
उमेश



बड़े भाई को उनके द्वारा भेजी गई शिक्षाप्रद पुस्तकों के लिए धन्यवाद पत्र

12 जनवरी, 2016
जवाहर नवोदय विद्यालय
पालीझर, बौद्ध
ओडिशा  

आदरणीय भाई साहब,
सादर चरण स्पर्श!
          मैं यहाँ कुशलपूर्वक हूँ और आशा करता हूँ कि आप लोग भी वहाँ कुशलपूर्वक होंगे। आपके द्वारा भेजी गई पुस्तकें मुझे प्राप्त हो गई हैं। आपने जो पुस्तकें भेजी हैं, वे बहुत ही शिक्षाप्रद हैं। मैं उन पुस्तकों को पढ़कर उनसे शिक्षा ग्रहण करने की पूरी कोशिश करूँगा। आशा है कि आप इसी प्रकार शिक्षाप्रद पुस्तकें भेजकर भविष्य में मेरा मार्गदर्शन करते रहेंगे।

          आपके द्वारा भेजी गई शिक्षाप्रद पुस्तकों के लिए आपको बहुत-बहुत धन्यवाद। माता-पिता को सादर प्रणामऔर छोटी को ढेर सारा प्यार।  
आपका अनुज
राकेश
                                                                                                                                  



अपने शहर के दर्शनीय स्थलों की प्रशंसा करते हुए अपने मामाजी को पत्र

12 जनवरी, 2016
कमरा संख्या W-245
पालीझर, बौद्ध
ओडिशा  

आदरणीय मामाजी,
सादर प्रणाम।

हम सभी यहाँ सकुशल हैं और आशा करता हूँ कि आप सब लोग भी वहाँ कुशलपूर्वक होंगे। मुझे आपका पत्र प्राप्त हुआ। मेरी इच्छा है कि आप इन गर्मी की छुट्टियों में सपरिवार यहाँ लखनऊ आएँ। लखनऊ एक बड़ा एवं खूबसूरत शहर है और क्योंकि यह उत्तर प्रदेश की राजधानी है, यहाँ कई दर्शनीय स्थल भी है। यहाँ पर छोटा इमामबाड़ा और बड़ा इमामबाड़ा हैं जो मुग़ल साम्राज्य की निशानी हैं। यहाँ की दीवारों पर की गई नक्काशी देखने लायक है। लखनऊ में आंचलिक विज्ञान केंद्र, कलगाँव, चिड़ियाघर, वनस्पति उद्यान, इंदिरा गांधी नक्षत्रशाला, भूल-भुलैया एवं शहीद स्मारक इत्यादि भी हैं जो अच्छे दर्शनीय स्थल हैं।

अब मैं पत्र समाप्त करता हूँ और यह आशा करता हूँ कि आप परिवार के साथ आएँगे। मामीजी को सादर नमस्ते और भाई को स्नेहाशीष।
आपका प्रिय भांजा
सुरेश  
                                                                                                                     




मित्र को स्वावलंबी बनने के लिए प्रेरित करते हुए पत्र लिखिए ।
12 जनवरी, 2016
कमरा संख्या W-245
पालीझर, बौद्ध
ओडिशा  

प्रिय मित्र राजू,
सप्रेम नमस्ते!

          मुझे तुम्हारा पत्र कल ही प्राप्त हुआ । पत्र के माध्यम से तुम्हारी निराशा स्पष्ट झलक रही थी । यह बिल्कुल ठीक नहीं है। यदि तुम्हारे पिताजी किसी कारणवश तुम्हें आगे पढ़ा पाने में सक्षम  नहीं हो रहे हैं तो इसमें हताश अथवा निराश होने जैसी कोई बात नहीं है । इस अवसर पर तुम्हें स्वावलंबी बनने की आवश्यकता है । प्रत्येक व्यक्ति को कभी न कभी अपने पैरों पर खड़ा होना ही पड़ता है । मुझे पूर्ण आशा है कि तुम अपना समय खोए बिना अपनी समस्या का हल स्वयं ही ढूँढ़ लोगे । स्वावलंबन में ही वास्तविक सुख है और यह तुम्हारे लिए एक अच्छा अवसर है । तुम अभी अस्थाई रूप से पार्ट टाइम नौकरी अथवा ट्‌यूशन आदि विकल्पों को अपनाकर आवश्यकताओं की पूर्ति कर सकते हो।
          अत: भाग्य अथवा किसी व्यक्ति विशेष को दोषी ठहराने के बजाय स्वयं अपनी सहायता करने का प्रयास करो। यह सत्य है कि ईश्वर भी उन्हीं की सहायता करता है जो अपनी सहायता स्वयं करते हैं।
          अपने माता-पिता को मेरा सादर प्रणाम कहना और छोटी को ढेर सारा प्यार।
तुम्हारा मित्र
अंकित




जन्मोत्सव में उपस्थित न हो सकने हेतु मित्र को पत्र

12 जनवरी, 2016
कमरा संख्या W-245
पालीझर, बौद्ध
ओडिशा  

प्रिय मित्र राजू,
सप्रेम नमस्ते!
          मैं यहाँ कुशलपूर्वक हूँ और आशा करता हूँ कि तुम भी कुशलपूर्वक होगे। मुझे आज ही तुम्हारा पत्र मिला और जानकर प्रसन्नता हुई कि 26 फरवरी को तुम्हारा जन्मदिन है और तुमने मुझे अपने जन्मोत्सव में आमंत्रित किया है। मित्र, मेरी अंतिम परीक्षा समीप है जिस कारण मैं तुम्हारे जन्मोत्सव में उपस्थित न हो सकूँगा। मैं तुम्हे जन्मदिन पर हार्दिक शुभकामनाएँ देता हूँ तथा तुम्हारी लंबी आयु के लिए ईश्वर से प्रार्थना करता हूँ। जन्मदिन के उपहार के रूप में तुम्हें घड़ी भेज रहा हूँ। आशा करता हूँ कि तुम्हे पसंद आएगी।

          अच्छा अब पत्र समाप्त करता हूँ। मेरी तरफ से तुम्हारे माता-पिता जी को सादर प्रणाम।
तुम्हारा प्रिय मित्र
रमेश
                                                                                                                           

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