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Friday, 24 July 2015



प्रश्न—अभ्यास
1 -निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर दीजिए -
(क) पहले छंद में कवि की दृष्टि आदमी के किन—किन रूपों का बखान करती है? क्रम से लिखिए।
(ख) चारों छंदों में कवि ने आदमी के सकारात्मक और नकारात्मक रूपों को परस्पर किन—किन रूपों में रखा है? अपने शब्दों में स्पष्ट कीजिए।
(ग) ‘आदमी नामा’ शीर्षक कविता के इन अंशों को पढ़कर आपके मन में मनुष्य के प्रति क्या धारणा बनती है?
(घ) इस कविता का कौन—सा भाग आपको सबसे अच्छा लगा और क्यों?
(ङ) आदमी की प्रवृत्तियों का उल्लेख कीजिए।



1. पहले छंद में कवि की दृष्टि मानव के निम्नलिखित रूपों का बखान करती हैं-
बादशाह, गरीब व दरिद्र, मालदार, स्वादिष्ट भोजन खाने वाला, रूखा-सूखा खाने वाला।
2. कवि ने आदमी के सकारात्मक और नकारात्मक दोनों रूपों का तुलनात्मक प्रस्तुतीकरण किया है, वे रूप इस प्रकार हैं-
सकारात्मक नकारात्मक
बादशाह गरीब व दरिद्र
मालदार कमजोर
स्वादिष्ट भोजन खाने वाला रूखा-सूखा खाने वाला
चोर पर निगाह रखने वाला जूतियाँ चुराने वाला
जान न्योछावर करने वाला जान लेने वाला
सहायता करने वाला अपमान करने वाला
शरीफ लोग कमीने लोग
अच्छे लोग बुरे लोग
3. आदमीनामा शीर्षक कविता के इन अंशों को पढ़कर हम इसी नतीजे पर पहुँचते हैं कि मनुष्य परिस्थितियों का दास होता है और अगर वह परिस्थितियों के सामने घुटने टेक देता है तो उसे हर अवस्था में समझौता करने की आदत पड़ जाती है। वह चाह कर भी फिर अपने मन की नहीं कर पाता यही कारण है कि कुछ लोग आश्रित या परजीवी होकर अपना जीवन बिता देते हैं और कुछ लोग अपने जीवन को मिसाल बना देते हैं।
4. ।
5. प्रत्येक आदमी शारीरिक बनावट और सोच के आधार पर अलग-अलग होते हैं। कुछ आदमी समस्या को जीवन का संघर्ष मानकर उससे लड़ते हैं। समस्या को एक चुनौती के रूप में स्वीकार करते हैं और उनका डट कर सामना करते हैं। इसी दुनिया में कुछ व्यक्ति ऐसे भी हैं जो मुसीबतों को विकट समस्या मानकर ईश्वर का आश्रय लेते हैं। ये विश्वास से ज़्यादा भाग्य पर भरोसा करते हैं। मेरा तो यह मानना है कि मनुष्य अपनी उम्दा सोच और क्रियाओं के द्वारा ही जग में अपना नाम अमर कर पाता है।


2 -निम्नलिखित अंशों की व्याख्या कीजिए -
(क) दुनिया में बादशाह है सो है वह भी आदमी
और मुफ़लिस—ओ—गदा है सो है वो भी आदमी
(ख) अशराफ़ और कमीने से ले शाह ता वज़ीर
ये आदमी ही करते हैं सब कारे दिलपज़ीर


1. प्रस्तुत पंक्तियों में कवि आदमी के भिन्न-भिन्न रूपों पर प्रकाश डालते हुए कह रहे हैं कि इस दुनिया में तरह-तरह के आदमी हैं। जो आवाम का बादशाह बना बैठा है वह भी आदमी है और उसके पास दुनिया भर की दौलत एशों-आराम हैं। दूसरी तरफ़ जो बिलकुल गरीब और भिखारी हैं वे भी आदमी ही हैं। ।
2. कवि अपनी इन पंक्तियों में इंसानों की फिदरत का ज़िक्र करते हुए कह रहे हैं कि इस दुनिया में कुछ आदमी शरीफ भी हैं और कुछ अव्वल दर्ज़े के कमीने भी। बादशाह से लेकर मंत्री तक सारे मनमाने काम करने वाले आदमी ही हैं। इनके कृत्य कभी सराहनीय होते हैं और कभी निंदनीय। ।



3 -निम्नलिखित में अभिव्यक्त व्यंग्य को स्पष्ट कीजिए -
(क) पढ़ते हैं आदमी ही कुरआन और नमाज़ यां
और आदमी ही उनकी चुराते हैं जूतियाँ
जो उनको ताड़ता है सो है वो भी आदमी
(ख) पगड़ी भी आदमी की उतारे है आदमी
चिल्ला के आदमी को पुकारे है आदमी
और सुनके दौड़ता है सो है वो भी आदमी




क. कवि कहते हैं कि जहाँ पर धर्म की बातें सिखाईं जाती हैं वहीं से जूते-चप्पल चुरा लिए जाते हैं और चुराने वाला चोर भी आदमी ही होता है और उनको देखने वाला भी आदमी ही होता है। अर्थात समाज में समुचित शिक्षा के विविध आयामों में खामियाँ हैं जिसकी वजह से ये सब क्रियाएँ हो रही हैं।

ख. कवि कहते हैं कि लोग अपनी अज्ञानता के कारण दूसरों को बेइज़्ज़त करते हैं। यही लोग अपनी समस्या में सहायता के उद्देश्य से चिल्ला कर लोगों को पुकारते हैं और उनकी पुकार को सुनकर मदद की मंशा से जो दौड़ता है वह भी आदमी ही है।इससे यह तो स्पष्ट होता है कि समाज में अनेक तरह के लोग मौजूद हैं पर हमे यह चाहिए कि हम अपनी सोच और सामाजिक स्तर इस तरह का बनाए कि कोई हमारी बेइज़्ज़ती न कर सके। हमें अपने आप को इस काबिल बनाना चाहिए कि हम दूसरों की भी मदद कर सकें।











Saturday, 15 November 2014

मौखिक

निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर एक—दो पंक्तियों में दीजिए-


1- अग्रिम दल का नेतृत्व कौन कर रहा था?


2- लेखिका को सागरमाथा नाम क्यों अच्छा लगा?


3- लेखिका को ध्वज जैसा क्या लगा?


4- हिमस्खलन से कितने लोगों की मृत्यु हुई और कितने घायल हुए?


5- मृत्यु के अवसाद को देखकर कर्नल खुल्लर ने क्या कहा?


6- रसोई सहायक की मृत्यु कैसे हुई?


7- कैंप—चार कहाँ और कब लगाया गया?


8- लेखिका ने शेरपा कुली को अपना परिचय किस तरह दिया?


9- लेखिका की सफलता पर कर्नल खुल्लर ने उसे किन शब्दों में बधाई दी?




1. अग्रिम दल का नेतृत्व उपनेता प्रेमचंद कर रहे थे ।


2. एवरेस्ट को नेपाली भाषा में सगरमाथा के नाम से जाना जाता है इसलिए लेखिका को सागरमाथा नाम अच्छा लगा।


3. एवरेस्ट की तरफ गौर-से देखते हुए लेखिका को एक भरी बर्फ का फूल दिखा जो पर्वत शिखर पर लहराता ध्वज-सा लग रहा था।


4. हिमस्खलन से एक की मृत्यु और चार घायल हुए। ।


5. मृत्यु के अवसाद को देखकर कर्नल खुल्लर ने क्या कहा कि एवरेस्ट जैसे महान अभियानों में खतरों को और कभी-कभी मृत्यु को सहज भाव से स्वीकार करना चाहिए।


6. एवरेस्ट शिखर पर चढ़ाई के दौरान जलवायु अमुकुल नहीं थी। हिमपात में अनिश्चित और अनियमित बदलावों के कारण रसोई सहायक की मृत्यु हो गई।


7. कैंप चार साउथ कोल में 29 अप्रैल को सात हज़ार नौ सौ मीटर की ऊँचाई पर लगाया गया। ।


8. लेखिका ने शेरपा कुली को अपना परिचय यह कहकर दिया कि मैं बिलकुल ही नौसिखिया हूँ और एवरेस्ट मेरा पहला अभियान है।


9. लेखिका की सफलता पर कर्नल खुल्लर ने बधाई देते हुए उन्होंने कहा, “मैं तुम्हारी इस अनूठी उपलब्धि के लिए तुम्हारे माता—पिता को बधाई देना चाहूँगा!” वे बोले कि देश को तुम पर गर्व है और अब तुम ऐसे संसार में वापस जाओगी, जो तुम्हारे अपने पीछे छोड़े हुए संसार से एकदम भिन्न होगा!



लिखित
(क) निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर (25-30 शब्दों में) लिखिए-
1- नज़दीक से एवरेस्ट को देखकर लेखिका को कैसा लगा?
2- डॉ. मीनू मेहता ने क्या जानकारियाँ दीं?
3- तेनजिंग ने लेखिका की तारीफ़ में क्या कहा?
4- लेखिका को किनके साथ चढ़ाई करनी थी?
5- लोपसांग ने तंबू का रास्ता कैसे साफ़ किया?
6- साउथ कोल कैंप पहुँचकर लेखिका ने अगले दिन की महत्त्वपूर्ण चढ़ाई की तैयारी कैसे शुरू की?



1. नज़दीक से एवरेस्ट को देखकर लेखिका को इतना अच्छा लगा कि वह भौंचक्की होकर देखती रही। बेस-कैंप पहुँचने पर दूसरे दिन एवरेस्ट और उसकी अन्य श्रेणियों को भी देखा। लोहत्से और नुत्से की ऊँचाई से घिरी बर्फ़ीली टेढ़ी-मेढ़ी नदी को भी निहारती रहती थी।
2. डॉक्टर मीनू ने उन्हें निम्न जानकारियाँ दीं –
क. अल्युमिनियम को सीढ़ियों से अस्थायी पूल बनाना।
ख. लट्ठों और रस्सियों का प्रयोग करना।
ग. बर्फ़ की आड़ी-तिरछी दीवारों पर रस्सियों को बाँधना।
घ. अग्रिम दल के अभियांत्रिकी कार्यों के बारे में विस्तृत जानकारी दी।
3. तेनजिंग ने लेखिका की तारीफ़ में कहा कि यह एक पर्वतीय लड़की है। इसे तो पहले ही प्रयास में शिखर पर पहुँच जाना चाहिए। इसके जोश को देखकर ऐसा लगता है मानो पर्वत और पर्वतीय स्थानों की इसे बहुत अच्छी जानकारी है।
4. लेखिका को तोपसांग, तशरिंग, एन. डी. शेरपा और आठ अन्य शरीर से मज़बूत जो और ऊँचाइयों में रहते थे उन शेरपाओं के साथ चढ़ाई करनी थी।
5. लोपसांग ने अपनी स्विस छुरी से बड़े-बड़े हिमखंडों को हटाया और चारों तरफ फैली हुई कठोर बर्फ़ की खुदाई की। इस प्रकार लोपसांग ने तंबू का रास्ता साफ़ किया ।
6. साउथ कोल कैंप पहुँचकर लेखिका ने अगले दिन की महत्त्वपूर्ण चढ़ाई की तैयारी के लिए खाना, कूकिंग गैस तथा कुछ ऑक्सीज़न सिलिंडर इकट्ठे किए । इसके बाद लेखिका अपने दूसरे साथियों की सहायता के लिए तथा अपने लिए एक थरमस में जूस और दूसरे थरमस में चाय भरने के लिए नीचे उतर गई।


लिखित
(ख) निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर (50-60 शब्दों में) लिखिए-
1- उपनेता प्रेमचंद ने किन स्थितियों से अवगत कराया?
2- हिमपात किस तरह होता है और उससे क्या—क्या परिवर्तन आते हैं?
3- लेखिका के तंबू में गिरे बर्फ़ पिंड का वर्णन किस तरह किया गया है?
4- लेखिका को देखकर ‘की’ हक्का—बक्का क्यों रह गया?
5- एवरेस्ट पर चढ़ने के लिए कुल कितने कैंप बनाए गए? उनका वर्णन कीजिए।
6- चढ़ाई के समय एवरेस्ट की चोटी की स्थिति कैसी थी?
7- सम्मिलित अभियान में सहयोग एवं सहायता की भावना का परिचय बचेंद्री के किस कार्य से मिलता है?


1. उपनेता प्रेमचंद ने अग्रिम दल को खुंभु हिमपात की स्थिति से पर्वतारोहियों को अवगत कराया। उन्होंने कहा कि उनके एक दल ने कैंप एक जो हिमपात के ठीक ऊपर है, वहाँ तक का रास्ता साफ़ कर दिया है। उन्होंने यह भी बताया कि पुल बनाकर, रस्सियाँ बाँधकर तथा झंडियों से रास्ता चिह्नित कर सभी बड़ी कठिनाइयों का जायजा ले लिया गया है। उन्होंने यह भी ध्यान दिलाया कि ग्लेशियर बर्फ़ की नदी है और बर्फ़ का गिरना अभी भी जारी है।
2. हिमपात का अर्थ है बर्फ़ की बारिश जिसकी वजह से रास्ते ढक जाते हैं और दरारों पर बर्फ़ पड़ जाने के कारण आना-जाना मुश्किल हो जाता है। पाठ में बर्फ़ के खंडों का अव्यवस्थित ढंग से गिरने को ही हिमपात कहा गया है। हिमपात अनिश्चित और अनियमित होता है। ग्लेशियर के ढहने से अधिकतर हलचल होती है। इससे बर्फ़ की बड़ी-बड़ी चट्टानें तुरंत गिर जाती है इससे धरातल पर दरारें पड़ जाती हैं।
3. लेखिका गहरी नींद में सोई थी कि रात में 12.30 बजे के लगभग लेखिका के सिर के पिछले हिस्से में किसी एक सख्त चीज़ के टकराने से लेखिका की नींद अचानक खुल गई और साथ ही एक ज़ोरदार धमाका भी हुआ। तभी लेखिका को महसूस हुआ कि एक ठंडी, बहुत भारी कोई चीज़ मेरे शरीर पर से मुझे कुचलती हुई चल रही है। मुझे साँस लेने में भी कठिनाई हो रही थी।एक लंबा बर्फ़ का पिंड कैंप के ठीक ऊपर ल्होत्से ग्लेशियर से टूटकर नीचे आ गिरा था और उसका विशाल हिमपुंज बना गया था। हिमखंडों, बर्फ़ के टुकड़ों तथा जमी हुई बर्फ़ के इस विशालकाय पुंज ने, एक एक्सप्रेस रेलगाड़ी की तेज़ गति और भीषण गर्जना के साथ, सीधी ढलान से नीचे आते हुए हमारे कैंप को तहस—नहस कर दिया।
4. – की लेखिका को देखकर हक्का-वक्का रह गया क्योंकि लेखिका साउथ कोल कैंप पहुँच चुकी थी फिर भी की से मिलने के लिए बर्फीली आँधी का सामना करते हुए नीचे आ गई थी। यह जानलेवा साबित हो सकता था। दूसरी तरफ यह लेखिका का पहला अभियान था और अनुभव बिलकुल नहीं।
5. एवरेस्ट पर चढ़ने केलिए कुल सात कैंप लगाए गए थे-
i. बेसकैंप- यह कैंप काठमांडू के शेरपालैंड में लगाया गया था।
ii. कैंप एक – यह हिमपात से 6000 मीटर की ऊँचाई पर था।
iii. कैंप दो – 16 मई प्रातः सभी लोग इस कैंप में पहुँचे।
iv. कैंप तीन - यह लोहात्से पहाड़ी के आँगन में स्थित था।
v. कैंप चार – यह समुद्र तल से 7900 मीटर ऊपर थ। यहीं से साउथ कोल कैंप और शिखर कैंप के लिए चढ़ाई की गई।
vi. साउथ कोल कैंप – यही से अंतिम दिन की चढ़ाई शुरू हुई।
vii. शिखर कैंप – यह शिखर की सर्वोत्तम चोटी से ठीक नीचे स्थित है।
6. चढ़ाई करते समय एवरेस्ट पर जमी बर्फ सीधी और ढलाऊ थी। दक्षिणी शिखर के ऊपर हवा की गति बढ़ गई थी। उस ऊँचाई पर तेज़ हवा के झोंके भुरभुरे बर्फ़ के कणों को चारों तरफ़ उड़ा रहे थे, जिससे दृश्यता शून्य तक आ गई थी। थोड़ी दूर के बाद कोई ऊँची चढ़ाई नहीं है। ढलान एकदम सीधा नीचे चला गया है। एवरेस्ट शंकु की चोटी पर दो व्यक्ति साथ—साथ खड़े हो सकें इतनी जगह भी नहीं थी।
7. सम्मिलित अभियान में सहयोग एवं सहायता की भावना का परिचय बचेंद्री के इस कार्य से मिलता है जब लेखिका ने अपने दल के दूसरे सदस्यों की मदद करने का निश्चय किया। इसके लिए वह एक थरमस को जूस और दूसरे को गरम चाय से भरकर बर्फीली हवा में तंबू से बाहर निकली और नीचे उतरने लगी। जय ने उसके इस प्रयास को खतरनाक बताया तो लेखिका ने जवाब दिया, “मैं भी औरों की तरह पर्वतारोही हूँ इसलिए इस दल में आई हूँ। मैं शारीरिक रूप से ठीक हूँ इसलिए मुझे अपने दल के सदस्यों की मदद करनी चाहिए।”



लिखित
(ग) निम्नलिखित के आशय स्पष्ट कीजिए-
1- एवरेस्ट जैसे महान अभियान में खतरों को और कभी—कभी तो मृत्यु भी आदमी को सहज भाव से स्वीकार करनी चाहिए।
2- सीधे धरातल पर दरार पड़ने का विचार और इस दरार का गहरे—चौड़े हिम—विदर में बदल जाने का मात्र खयाल ही बहुत डरावना था। इससे भी ज़्यादा भयानक इस बात की जानकारी थी कि हमारे संपूर्ण प्रयास के दौरान हिमपात लगभग एक दर्जन आरोहियों और कुलियों को प्रतिदिन छूता रहेगा।
3- बिना उठे ही मैंने अपने थैले से दुर्गा माँ का चित्र और हनुमान चालीसा निकाला। मैंने इनको अपने साथ लाए लाल कपडे़ में लपेटा, छोटी—सी पूजा—अर्चना की और इनको बर्फ़ में दबा दिया। आनंद के इस क्षण में मुझे अपने माता—पिता का ध्यान आया।



1. इस कथन के माध्यम से कर्नल खुल्लर यह कहना चाहते हैं कि एवरेस्ट पर पहुँचना एक महान अभियान है। इस लक्ष्य को प्राप्त करने की लालशा में कितने लोगों की मृत्यु हो चुकी है। इस अभियान में कदम-कदम पर खतरा बना रहता है।
2. इन कथनों के माध्यम से लेखिका एवरेस्ट अभियान की भयावहता को सजीव कर रही हैं। बड़े—बड़े हिम खंडों का गिरना और उसके परिणाम बड़े ही खतरनाक हैं। लेखिका हिम – विदर की कल्पना कर सिहर उठती है। इसके अतिरिक्त हिमपात का प्रकोप इस अभियान को और भी अधिक भयानक बना रहा था परंतु बिना हिम्मत खोए वो अपना लक्ष्य प्राप्त करती है।
3. लेखिका एवरेस्ट की शंकु पर पहुँचने वाली पहली भारतीय महिला हैं। लेखिका ने अपने विजय का श्रेय माँ दुर्गा और हनुमानजी को दिया। एवरेस्ट की शंकु पर इनकी पूजा यह दर्शाता है कि ये धार्मिक स्वभाव की हैं। ये पल उन्हें अपने जीवन के सबसे आनंद के पल लग रहे थे जिसे वह अपने माता-पिता के साथ बाँटना चाहती थी। इससे यह पता चलता है कि ये अपने माता-पिता का बहुत सम्मान करती हैं।

Wednesday, 16 October 2013

Agar koi aapki taarif had se jyada kar raha hai to iske do hi matlab ho sakte hain ya to wo aapka majak bana raha hai ya aapse aur jayada ki ummeed kar raha hai.