Hindi Language Promotion and Development

Sunday, 25 September 2016

Teri Uplabdhi By Avinash Ranjan Gupta

तेरी उपलब्धि

हो न अचंभित देख के उपलब्धियाँ तू औरों की,
उड़ते हैं विस्तृत गगन में छोटे पंख भी भौरों की,
चीटियाँ भी हैं उठातीं भार खुद से कहीं अधिक,
लौह भी है निखरता प्रहार सहकर शताधिक।
तू भी रच सकता है इतिहास खुद पर विश्वास रख,
शक्तियाँ तुझमें असीम हैं इसकी अब तू कर परख,
तू करेगा खुद को विस्मित कर ले तू इस पर यकीन,
झोंक कर सारी शक्ति को जीत कर अपनी मुमकिन।  
एक वैरी न मिलेगा बात मेरी मान ले,  
संघर्ष तेरा खुद से है ये आज तू ये जान ले,  
रुक गए कितने पथिक हैं बाट का कष्ट जानकर,
पर मिलेंगे मोती तुझको कठिनाइयों को पार कर।  
मौत तो आनी है एक दिन वो तो आकर ही रहेगी,  
पर मौत ही जज़्बे के तेरे जीत को ज़िंदा रखेगी।
                                                अविनाश रंजन गुप्ता