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Friday, 28 August 2015

Aadminana Nazeer Akbarabaadi

प्रश्न—अभ्यास
1 -निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर दीजिए -
(क) पहले छंद में कवि की दृष्टि आदमी के किन—किन रूपों का बखान करती है? क्रम से लिखिए।
(ख) चारों छंदों में कवि ने आदमी के सकारात्मक और नकारात्मक रूपों को परस्पर किन—किन रूपों में रखा है? अपने शब्दों में स्पष्ट कीजिए।
(ग) ‘आदमी नामा’ शीर्षक कविता के इन अंशों को पढ़कर आपके मन में मनुष्य के प्रति क्या धारणा बनती है?
(घ) इस कविता का कौन—सा भाग आपको सबसे अच्छा लगा और क्यों?
(ङ) आदमी की प्रवृत्तियों का उल्लेख कीजिए।


1. पहले छंद में कवि की दृष्टि मानव के निम्नलिखित रूपों का बखान करती हैं-
बादशाह, गरीब व दरिद्र, मालदार, स्वादिष्ट भोजन खाने वाला, रूखा-सूखा खाने वाला।
2. कवि ने आदमी के सकारात्मक और नकारात्मक दोनों रूपों का तुलनात्मक प्रस्तुतीकरण किया है, वे रूप इस प्रकार हैं-
सकारात्मक नकारात्मक
बादशाह गरीब व दरिद्र
मालदार कमजोर
स्वादिष्ट भोजन खाने वाला रूखा-सूखा खाने वाला
चोर पर निगाह रखने वाला जूतियाँ चुराने वाला
जान न्योछावर करने वाला जान लेने वाला
सहायता करने वाला अपमान करने वाला
शरीफ लोग कमीने लोग
अच्छे लोग बुरे लोग
3. आदमीनामा शीर्षक कविता के इन अंशों को पढ़कर हम इसी नतीजे पर पहुँचते हैं कि मनुष्य परिस्थितियों का दास होता है और अगर वह परिस्थितियों के सामने घुटने टेक देता है तो उसे हर अवस्था में समझौता करने की आदत पड़ जाती है। वह चाह कर भी फिर अपने मन की नहीं कर पाता यही कारण है कि कुछ लोग आश्रित या परजीवी होकर अपना जीवन बिता देते हैं और कुछ लोग अपने जीवन को मिसाल बना देते हैं।
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5. प्रत्येक आदमी शारीरिक बनावट और सोच के आधार पर अलग-अलग होते हैं। कुछ आदमी समस्या को जीवन का संघर्ष मानकर उससे लड़ते हैं। समस्या को एक चुनौती के रूप में स्वीकार करते हैं और उनका डट कर सामना करते हैं। इसी दुनिया में कुछ व्यक्ति ऐसे भी हैं जो मुसीबतों को विकट समस्या मानकर ईश्वर का आश्रय लेते हैं। ये विश्वास से ज़्यादा भाग्य पर भरोसा करते हैं। मेरा तो यह मानना है कि मनुष्य अपनी उम्दा सोच और क्रियाओं के द्वारा ही जग में अपना नाम अमर कर पाता है।

2 -निम्नलिखित अंशों की व्याख्या कीजिए -
(क) दुनिया में बादशाह है सो है वह भी आदमी
और मुफ़लिस—ओ—गदा है सो है वो भी आदमी
(ख) अशराफ़ और कमीने से ले शाह ता वज़ीर
ये आदमी ही करते हैं सब कारे दिलपज़ीर

1. प्रस्तुत पंक्तियों में कवि आदमी के भिन्न-भिन्न रूपों पर प्रकाश डालते हुए कह रहे हैं कि इस दुनिया में तरह-तरह के आदमी हैं। जो आवाम का बादशाह बना बैठा है वह भी आदमी है और उसके पास दुनिया भर की दौलत एशों-आराम हैं। दूसरी तरफ़ जो बिलकुल गरीब और भिखारी हैं वे भी आदमी ही हैं। ।
2. कवि अपनी इन पंक्तियों में इंसानों की फिदरत का ज़िक्र करते हुए कह रहे हैं कि इस दुनिया में कुछ आदमी शरीफ भी हैं और कुछ अव्वल दर्ज़े के कमीने भी। बादशाह से लेकर मंत्री तक सारे मनमाने काम करने वाले आदमी ही हैं। इनके कृत्य कभी सराहनीय होते हैं और कभी निंदनीय। ।

3 -निम्नलिखित में अभिव्यक्त व्यंग्य को स्पष्ट कीजिए -
(क) पढ़ते हैं आदमी ही कुरआन और नमाज़ यां
और आदमी ही उनकी चुराते हैं जूतियाँ
जो उनको ताड़ता है सो है वो भी आदमी
(ख) पगड़ी भी आदमी की उतारे है आदमी
चिल्ला के आदमी को पुकारे है आदमी
और सुनके दौड़ता है सो है वो भी आदमी

क. कवि कहते हैं कि जहाँ पर धर्म की बातें सिखाईं जाती हैं वहीं से जूते-चप्पल चुरा लिए जाते हैं और चुराने वाला चोर भी आदमी ही होता है और उनको देखने वाला भी आदमी ही होता है। अर्थात समाज में समुचित शिक्षा के विविध आयामों में खामियाँ हैं जिसकी वजह से ये सब क्रियाएँ हो रही हैं।

ख. कवि कहते हैं कि लोग अपनी अज्ञानता के कारण दूसरों को बेइज़्ज़त करते हैं। यही लोग अपनी समस्या में सहायता के उद्देश्य से चिल्ला कर लोगों को पुकारते हैं और उनकी पुकार को सुनकर मदद की मंशा से जो दौड़ता है वह भी आदमी ही है।इससे यह तो स्पष्ट होता है कि समाज में अनेक तरह के लोग मौजूद हैं पर हमे यह चाहिए कि हम अपनी सोच और सामाजिक स्तर इस तरह का बनाए कि कोई हमारी बेइज़्ज़ती न कर सके। हमें अपने आप को इस काबिल बनाना चाहिए कि हम दूसरों की भी मदद कर सकें।