हिंदी देश की भाषा है A Poem on Hindi By Avinash Ranjan Gupta

 

हिंदी देश की भाषा है

भारत की परिभाषा है, हिंदी देश की भाषा है।

हिंदी विकसित विमलित हो, यही हमारी आशा है।

 

हिंदी हृदय को छूती है, भेद-भाव सब हरती है।

आगत को अपनाती है, यह बढ़ती ही जाती है।

चहूँ दिशाओं में अपनी मिष्टि की वृष्टि करती है।

भाषा की यह उषा है, प्रभात प्रसूत प्रत्यूषा है।

 

भारत की परिभाषा है, हिंदी देश की भाषा है।

हिंदी विकसित विस्तृत हो, यही हमारी आशा है।

 

हम सब इसके प्रेमी है, यह पहचान हमारी है।

शब्द रस है, छंद गीत है, लिपि इसकी प्यारी है।

कामिल, मारिया, मूलर के लिए ये अति मनुहारी है।

मनीषा की मंजूषा है, अब लक्ष्य की लिप्सा है।

 

भारत की परिभाषा है, हिंदी देश की भाषा है।

हिंदी विकसित विजयित हो, यही हमारी आशा है।

 

हिंदी अपना साईं है, हम सब इसके सेवी हैं।

ज्ञान निधि की राशि है, ये तो वाणी देवी है।

बाँध रही है सूत्र में सबको अद्भुत ऐसी डोरी है।

अक्षय हो अविनाशी हो, हम सबकी अभिलाषा है।

 

भारत की परिभाषा है, हिंदी देश की भाषा है।

हिंदी विकसित शोभित हो, यही हमारी आशा है।

अविनाश रंजन गुप्ता

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