पुत्र प्राप्ति Par Ek Kavita By Avinash Ranjan Gupta

  

पुत्र प्राप्ति

 

नवजात, कोमल पाँत की भाँति जगत में आए हो,

जनक-जननी के हो स्नेह तुम हर्ष लेकर आए हो,

किलकारियाँ हैं मंगल ध्वनि, क्रंदन सुवासित चंदन है,

फैली है आभा तुमसे ही तुम पुंज बनकर आए हो।

 

क्रीड़ा तुम्हारी कृष्णमयी, स्मित तुम्हारी रमणीय,

है कंठ तेरा रागमय, वाणी है जैसी वंदनीय,

शांति-सौख्य के वाहक हो तुम, कृपा बनकर आए हो,   

रूप में तुम्हारे मानो रघुपतिगोविंद समाए हों।

 

विश्वकल्याण का ध्येय हो, कीर्ति फैले अपरिमेय,

कामना है चहुँदिशाएँ गाएँ तेरी जय जय जय,

मानवता है धर्म तेरा, कर्म में तुम लीन हो,

जगत का उद्धार करने तुम अवतार लेकर आए हो।   

अविनाश रंजन गुप्ता

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