Baal Kavita On Ant चींटी


चींटी
चींटी रानी ! चींटी रानी !
कितना तुम पीती हो पानी ?
कोई क्या न बना पैमाना ?
बड़ा कठिन अंदाज लगाना ।।
खाना तुम कितना खाती हो?
घंटे में कितना जाती हो ?
कब जगती हो कब सोती हो ?
कब हँसती हो कब रोती हो ?
आओ  ! अपना हाल बताओ।
लो इस उँगली पर चढ़ जाओ ।।
मुझे बहुत ही तुम भाती हो ।
ठहरो, कहाँ भागी जाती हो !
काम रात-दिन करती हो तुम।
नहीं किसी से डरती हो तुम ।।
फिरती रहती हो मनमाना ।
फिर-फिर आना फिर-फिर जाना ॥
नौकर झाड़ू लगा लगाने ।
मरी हज़ारों इसी बहाने ॥
कुचल पैर से कोई देता ।
पर कुछ खबर न कोई लेता ॥
बिल में यदि भर आया पानी ।
हुई तुम्हारी अकथ कहानी ॥
देखो तो ईश्वर की माया ।
कैसा छोटा तुम्हें बनाया !
ढो-ढो करके दाना-दाना ।
किया इकट्ठा बड़ा खजाना ।।
छोटा बदन काम है भारी ।
क्यों न आदमी बने भिखारी ?
चींटी यदि लेकर इतना भारी तन ।
बैठा रहे आलसी सा बन ॥
धन्य ! हमारी चींटी रानी !
बड़ी बहादुर बड़ी सयानी ।।
लो लाया हूँ चींटी! खा लो।
मानो कहा, जरा सुस्ता लो ।
मेहनत का मीठा फल खालो ।
आओ! चींटी रानी ! आओ !
मैं भी डट के काम करूँगा
बहुत नहीं आराम करूँगा ।
आलस से कुछ काम न होगा ।
बिना काम के नाम न होगा ।।



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