नए और अप्रत्याशित विषयों पर लेखन By Avinash Ranjan Gupta


नए और अप्रत्याशित विषयों पर लेखन
अप्रत्याशित शब्द का क्या अर्थ है?
अ+प्रति+आशा+इत=अप्रत्याशित अर्थात् जिसकी आशा न की गई हो।
अप्रत्याशित विषयों पर लेखन क्या है?
ऐसे विषय जिसकी आपने कभी आशा भी न की हो उस पर लेखन कार्य करना ही अप्रत्याशित विषयों पर लेखन कहलाता है।
पारंपरिक और अप्रत्याशित विषयों में अंतर
पारंपरिक विषय वो विषय होते हैं जो किसी मुद्दे, विचार, घटना आदि से जुड़े होते हैं और अधिकतर सामाजिक और राजनीतिक विषय होते हैं। इसमें आप अपनी व्यक्तिगत राय को उतनी तवज्जह न देकर सामूहिक विचार पर ज़ोर देते हैं, जबकि अप्रत्याशित विषयों पर लेखन में आपके अपने निजी विचार होते हैं।
अप्रत्याशित विषयों पर लेखन से लाभ
पहला तो यह कि ये आपकी मौलिक रचना होगी। दूसरा, इसमें आप अपने विचारों को किसी तर्क, विचार के माध्यम से पुष्ट करने की कोशिश करेंगे। तीसरा, इससे आपके लेखन कौशल में अत्यधिक विकास होगा। चौथा, इससे भाषा पर आपकी अच्छी पकड़ बनेगी। पाँचवाँ, अप्रत्याशित विषयों पर लेखन कम समय में अपने विचारों को संकलित कर उन्हें सुंदर और सुघड़ ढंग से अभिव्यक्त करने की चुनौती है। ऐसी चुनौतियों का सामना करके आप दृढ़ व्यक्तित्व वाले व्यक्ति बनेंगे।
अप्रत्याशित विषयों पर लेखन को प्राथमिकता क्यों?
हमें जब भी कुछ लिखने को दिया जाता है तो हम या तो निबंध की पुस्तकें खँगालने लगते हैं या इंटरनेट में गूगल करने लगते हैं या फिर किसी अनुभवी व्यक्तियों से सलाह-मसविरा करने लगते हैं परंतु अप्रत्याशित विषयों पर लेखन से हमारी आत्म उन्नति के द्वार खुलते हैं क्योंकि ऐसे विषय न तो निबंध की किताबों में न तो इंटरनेट पर और न ही  अनुभवी व्यक्तियों के अनुभव से प्राप्त होते हैं। यह तो हमारी अपनी मानसिक उपज होती है जो आत्म-अनुभव पर आधारित होती है।
क्या अप्रत्याशित विषयों पर लेखन कोई निश्चित रूप लेती है?
जी नहीं, ऐसा बिलकुल नहीं है, जब आप अपने विचारों को अपने अनुभव, तर्क, सिद्धांत, समाज, स्थान, काल और पात्र के आधार पर शब्दांकित करते हैं तो वो कभी संस्मरण, कभी निबंध, कभी रेखाचित्र, कभी कहानी, कभी यात्रा वृतांत कभी रिपोतार्ज आदि साहित्यिक विधा का रूप ले सकता है।   
अप्रत्याशित विषयों पर लेखन के विषय क्या हो सकते हैं?
ये विषय कुछ भी हो सकते हैं, जैसे दीवाल घड़ी, बारिश में बिन छतरी, तीन घंटे का अकेलापन, दिव्य शक्तियाँ और मैं, फर्ज कीजिए आप तिलचट्टा हैं, धारावाहिकों में स्त्री, समुद्र किनारे आप और आपकी यादें वगैरह-वगैरह।
अप्रत्याशित विषयों पर लेखन के नियम
-   आप इसमें मैं शैली का प्रयोग कर सकते हैं।
-   विविध कोणों से विषय पर विचार कर लें।
-   विवरण और विवेचन सुसंबद्ध और सुसंगत हो।
-   भाषायी शुद्धता पर विशेष ध्यान दें।

Comments

Post a comment