देखो मेरे बेटे तुम Dekho Mere Bete Tum A Poem On Child Growth By Avinash Ranjan Gupta


देखो मेरे बेटे तुम
मेरे बेटे देखो तुम,
धीरे-धीरे बढ़ने लगे।  
नन्हें नन्हें  पैरों से
हौले-हौले चलने लगे
तुतलाती बोली में
कुछ-कुछ कहने लगे।
मेरे बेटे देखो तुम,
धीरे-धीरे बढ़ने लगे।  
देखके खिलौनों को
खिला-खिलके हँसने लगे
छू ले अगर उसको कोई तो
ठुन-ठुनाके के रोने लगे।
मेरे बेटे देखो तुम,
धीरे-धीरे बढ़ने लगे।  
करके सारी शरारतें
तुम हमको सताने लगे
मम्मी-पापा कह कहकर
तुम प्यार जताने लगे
मेरे बेटे देखो तुम,
धीरे-धीरे बढ़ने लगे।  
छोटी छोटी  बातों पर
तुम अब रूठने लगे
करके किसिम के अभिनय
हम तुमको मनाने लगे
मेरे बेटे देखो तुम,
धीरे-धीरे बढ़ने लगे।  
माता तेरी मार्गदर्शिका
पिता सखा बनने लगे,
हम दोनों मिलकर तेरे,
भविष्य को गढ़ने लगे।
मेरे बेटे देखो तुम,
धीरे-धीरे बढ़ने लगे।  


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