विशेषणों का प्रयोग Visheshanon Ka Prayog By Avinash Ranjan Gupta


विशेषणों का प्रयोग  

पेशे से मैं एक शिक्षक हूँ वो भी भाषा का। भाषा की दिन-प्रतिदिन के जीवन में क्या भूमिका है इस बात की जानकारी मैं सदा अपने छात्रों को देता हूँ पर यह मेरे लिए संभव नहीं कि मैं सभी बच्चों और बड़ों को सही भाषा के प्रयोग की जानकारी दे सकूँ इसलिए यह लेख लिख रहा हूँ ताकि इंटरनेट के माध्यम से यह विश्व के हर दिशाओं तक पहुँच सके।
जब हमारे घर या ऑफिस कोई मेहमान या अतिथि आते हैं तो हम उनकी प्रशंसा में अनेक विशेषणों का प्रयोग करते हैं, जैसे- आप तो महान हैं, ये तो आपकी सज्जनता है, आपके शुभ कदमों से हमारा घर पवित्र हो गया। किसी से लड़ाई झगड़ा हो जाए तो भी हम विशेषणों का प्रयोग करते ही हैं जैसे- तुम बहुत बदमाश हो, तुम्हारे जैसा बेकार आदमी मैंने कहीं नहीं देखा। इसके अतिरिक्त हम कभी-कभी विशेषणों का अनावश्यक प्रयोग कर बैठते हैं जिससे हमारी साख या विश्वसनीयता कम हो जाती है, जैसे- अगर कोई एक या दो दिन भूलवश गलती कर बैठा तो हम यह कह देते हैं, “वो तो हमेशा गलती करता है। वह भरोसेमंद नहीं है।”, अगर कोई छात्र दो दिनों तक किसी विषय की कॉपी नहीं लाता है तो अन्य छात्र कह देते हैं, “सर, ये हमेशा भूल जाता है। ये गैरजिम्मेदार है।” अगर किसी ने किसी को थोड़ा-सा डाँट दिया हो तो डाँट खाने वाले का यही कहना होगा, “उसने मुझे बहुत डाँटा। मुझे बहुत गुस्सा आ रहा था, मेरी थोड़ी भी गलती नहीं थी।”आपको चाहिए कि विशेषणों का सही प्रयोग करने की कोशिश करें इससे भाषा और आपकी बोली दोनों सुंदर बनती हैं।

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