MEERA KE PAD मीरा के पद CLASS X B 2 MARKS QUESTION ANSWERS


2 Marks Questions
1.   मीरा कृष्ण से मिलने के लिए कुसुम्बी साड़ी ही क्यों पहनना चाहती हैं?
2.   मीरा श्रीकृष्ण की चाकरी क्यों करना चाहती है?
3.   मीरा कृष्ण से मिलने के संबंध में क्या कहती हैं?
4.   मीरा के प्रभु ने किस-किस पर कृपा की है?
5.   मीरा की भक्ति भावना पर प्रकाश डालिए।
6.   मीरा कृष्ण की दासी बनकर क्या-क्या काम करेंगी?
7.   पहले पद में मीरा ने हरि से अपनी पीड़ा हरने की विनती किस प्रकार की है?
8.   दूसरे पद में मीराबाई श्याम की चाकरी क्यों करना चाहती हैं? स्पष्ट कीजिए।
9.   मीराबाई ने श्रीकृष्ण के रूप सौंदर्य का वर्णन कैसे किया है?

2 Marks Answers
1.   कुसुम्बी रंगकेसरिया रंगको कहा जाता है। यह रंग त्याग का प्रतीक है। वैराग्य लेने वाले व्यक्ति इसी रंग के वस्त्र पहनते हैं। मीरा भी कृष्ण भक्ति में संसार से वैराग्य ले चुकी हैं। अतः वह कुसुम्बी साड़ी पहनना चाहती हैं।
2.   मीरा श्री कृष्ण की चाकरी इसलिए करना चाहती हैं क्योंकि ऐसा करने से मीरा कृष्ण की सेवा कर पाएँगी। उनको प्रतिदिन कृष्ण के दर्शन होंगे और प्रभु-स्मरण तथा भाव-भक्ति की जागीर मिलेगी।
3.   मीरा कृष्ण से मिलने के लिए कुसुम्बी साड़ी पहनकर यमुना तट पर आधी रात को प्रतीक्षा करने को तैयार हैं। श्रीकृष्ण से मिलने के लिए उनका ह्रदय बहुत अधीर है।
4.   मीरा के प्रभु ने द्रौपदी का वस्त्र बढ़ाकर उसकी अस्मिता की रक्षा की। भक्त प्रह्लाद की रक्षा करने के लिए नरसिंह अवतार लिया। डूबते हुए गजराज को मगरमच्छ से बचाया।
5.   मीरा कृष्ण की अनन्य भक्त हैं। वे श्रीकृष्ण को अपना प्रियतम मानती हैं। स्वयं को कृष्ण की दासी मानते हुए वह उनके लिए कुछ भी करने को तैयार हैं। वह अपने प्रभु के दर्शन, उनके स्मरण और भाव भक्ति पाने हेतु तत्पर हैं। वे कृष्ण के प्रति पूरी तरह समर्पित हैं और उनसे मिलने के लिए व्याकुल होकर यमुना तट पर जाने को भी तैयार हैं। दूसरी और वे कृष्ण को रक्षा में सक्षम मानते हुए उनसे जन-जन की पीड़ा हरने की विनती करती हैं।
6.   मीरा कृष्ण की दासी बनाकर उनके लिए बाग़ लगाएँगी, ऊँचे-ऊँचे महल बनाकर कृष्ण को वहाँ रखेंगी और वृन्दावन की कुञ्ज गलियों में गोविन्द-लीला गाएँगी।

7.   पहले पद में मीरा स्वयं को कृष्ण की दासी बताते हुए उनसे अपनी और लोगों की पीड़ा हरने की विनती करती हैं और उन्हें याद दिलाती है कि उन्होंने द्रौपदी, भक्त प्रह्लाद, गजराज आदि की सहायता अनेक अवतार लेकर की थी इसलिए मीरा की पीड़ा का हरण करना भी उनका कर्त्तव्य है। मीरा भी कृष्ण की कृपा-पात्र होने की अधिकारिणी है।
8.   दूसरे पद में मीराबाई श्याम की चाकरी इसलिए करना चाहती है ताकि वह उनके पास रहकर नित्य उनके दर्शन कर सके और उनका नाम स्मरण कर सकेंगी। साथ ही उन्हें वहाँ भक्ति-भावना की जागीर मिलेगी। इस प्रकार एक तो इस चाकरी से मीरा को कृष्ण की सेवा का अवसर मिलेगा। दूसरे वे कृष्ण की निकटता पाने में सफल हो जाएगी।
9.   मीराबाई ने श्रीकृष्ण करूप सौंदर्य का वर्णन करते हुए बताया कि उनके कृष्ण पीताम्बर पहनते थे। उनके सिर पर मोर-मुकुट और गले में वैजंतीमाला शोभायमान है और वे मनमोहिनी बाँसुरी बजाते हैं।

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