‘गीतांजलि’ काव्य संग्रह की समीक्षा Geetanjali Review By Avinash Ranjan Gupta


गीतांजलि काव्य संग्रह की समीक्षा
गीतांजलि   
रवीन्द्रनाथ टैगोर     

          भारतीय आधुनिकता के पहले स्तंभ रवीन्द्रनाथ टैगोर का जन्म 7 मई 1861 को हुआ।  अपनी अमर कृति गीतांजलि के लिए इन्हें 1913 में साहित्य का नोबेल पुरस्कार प्राप्त हुआ है। 

          गीतांजलि शब्द गीत और अंजलि को मिला कर बना है जिसका अर्थ है, गीतों का उपहार या भेंट। इसमें 103 कविताएँ हैं। भक्तिमय गीत, प्रेम, सौंदर्य और करुणा का जो उदात्त रूप गीतांजलि के गीतों में है, उसकी मिसाल पूरी दुनिया में नहीं है। इन गीतों के अध्ययन मात्र से ही मनुष्य आनंद के सागर में गोते लगाने लगता है।

          इस काव्य संग्रह में मेरी रुचि का कारण मेरी हर पल बढ़ती जिज्ञासा है जो इसके हरेक गीत में बलवती होती है और ऐसी जद्दोजहद वाली समस्याएँ मेरे जीवन में भी यदा-कदा आती रहती हैं।

           
           असल में ' गीतांजलि ' के गीत हृदय के तारों को झंकृत करते हैं और मैं यह काव्य संग्रह उन सभी पाठकों से पढ़ने का निवेदन करूँगा जो अपने आपसे रू-ब-रू होना चाहते  हैं।

समीक्षक : अविनाश रंजन गुप्ता
दिनांक : 12.06.2018

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