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महत्त्वपूर्ण तथ्य

पाठ  सपनों के-से दिनके कुछ स्मरणीय बिंदु 
1.     पाठ  सपनों के-से दिन के लेखक गुरदयाल सिंह हैं।
2.     इस पाठ में बचपन की मस्ती का ज़िक्र है। बचपन में लेखक पड़ोस के बच्चों के साथ खूब खेला करते थे। पढ़ाई-लिखाई का बोझ अपने सिर पर नहीं लेते थे। उनके लिए तो स्कूल किसी कैदखाने से कम न होता था।
3.     ग्रीष्मावकाश में मिले गृहकार्य को पूरा करने के लिए लेखक अनेक योजनाएँ बनाता था। अक्सर आज के काम को कल पर टाल देता था और इस तरह छुट्टियाँ कम होने लगती और गृहकार्य को पूरा न करके शिक्षकों की मार खाना ही सस्ता सौदा मानते थे।   
4.     प्रीतमचंद की तुलना में हैडमास्टर मदनमोहन शर्मा का स्वभाव बिल्कुल विपरीत था। वे बच्चों को कभी भी नहीं मारते थे। अधिक गुस्सा हो जाने पर आँखें झपकाने लगते थे और मारते भी थे तो बड़ी हल्की चपत से।      
5.     बच्चों को स्कूल में होनेवाली ड्रिल या परेड जैसी गतिविधियाँ बहुत आकृष्ट करती थी।       
6.     इस पाठ में लेखक को इस बात से हैरानी होती है कि प्रीतमचंद जैसे खतरनाक टीचर जिससे सभी बच्चे थर-थर काँपते हैं। वे किस तरह तोते को बादाम की गिरियाँ खिलाते  हैं और वह तोता भी बिना किसी डर के उनके हाथों से       गिरियाँ खा लेता  है।
7.     आजकल के स्कूलों में विद्यार्थियों को अनुशासित बनाए रखने के लिए अनेक नियम बनाए जाते हैं जैसे-
गृहकार्य न करने या अनुशासन भंग करने पर  उसके अभिभावकों या प्राचार्य से  शिकायत करना।
आर्थिक दंड आरोपित करना
विद्यालय से कुछ दिनों के लिए निलंबित कर देना।

विद्यालय से नाम काट देना।    

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