Jeevan Mulya

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  1. This is really nice. Keep it up

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    1. Tere ko sapne aaya hai ki vo sir hai mam bhi toh ho skti hai

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  4. मालूम है ना, हम जाने तुमको तुमसे ज़्यादा
    तुमको मिला है वो, सालों से जो भी है माँगा
    कैसे खिलौनों की रो-रो के करते थे माँगें
    इक बार मिल जाए, दो दिन में ही भूल जाते
    लेकिन खिलौनों के दिल तो होते ही नहीं थे
    दिल तो हमारा है, जाने ग़लत क्या सही ये
    कितना थे चाहते, पर अब तुमको याद ना आते हम
    क्या याद तुमको, तुम हमको "इनाम" थे कहते?
    करते थे कितना कुछ पाने की चाह में पहले
    अब ये इनाम का तुम पे इल्ज़ाम है, जानाँ
    दिल है गवाह, जीते जब से हो, तुमको है हारा
    चीज़ें बदलती हैं, इतना तो हमने भी माना
    इतना बदल जाओगे, जानाँ, किस ने था जाना
    जो थे परवाना, अब उसको हमारी परवाह ना क्यूँ?
    दिल में बात क्या है? हाँ, बोलो हमसे
    चाहता और क्या है? हाँ, बोलो हमसे
    क्या कमी यहाँ है? हाँ, बोलो हमसे ना
    जो कहा, मिला है, हाँ, बोलो हमसे
    बदले में भला है, हाँ, बोलो हमसे
    माँगा तुमसे क्या है? है माँगा ज़रा सा ही
    क्या ही? क्या? हाय
    बस, जो ख़त लिखे थे तुमने, उन्हें पढ़ भी लो ज़रा
    वादे किए थे जो भी, निभाओ ना ऐसे कभी
    इन वादों की सियाही अभी सूखी ही कहाँ?
    है तुम्हारी ही लिखाई, या भूले हो ये भी?
    कहने को, वाह-वाह, तुम फिर से इनाम हो जीते
    चेहरे पर मुस्काँ, पर आँखें हैं ख़ुश ना कहीं से
    हमने कहा था, "हम जाने तुमको तुमसे ज़्यादा"
    शायद ग़लत थे, पर इतना तो हमने है जाना
    हर वो इनाम क़दर के बिना ही है वैसे
    घर में पड़े, धूल खाते खिलौनों के जैसे
    पल-भर बहलाएँ, पर दिल को ये ख़ुश ना कर पाएँ यूँ
    घर बैठे लिखता था दिल की कहानी मेरी
    चारों तरफ़ थीं दीवारें, दीवारों से ही कहता था
    "इक दिन जहाँ होगा हाथों में ही", आ-आ, आ-आ
    जो था गुमनामों में, अब वो इनामों पे भी
    क़ैदी है, क़ैदी ही है फिर भी दीवारों में ही
    ना-मुमकिन ख़्वाबों में ना-ख़ुश उड़ानें मेरी, आ-आ, आ-आ, आ

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