Hindi Language Promotion and Development: Poudhe Ke Pankh By Avinash Ranjan Gupta

Monday, 18 April 2016

Poudhe Ke Pankh By Avinash Ranjan Gupta



पौधे के पंख
शशिप्रभा शास्त्री

डायरी के पन्ने
1.     प्रश्नोत्तरी
क.  श्रीधर लेखक की माँ की प्रिय सखी रीता का पुत्र है। जब लेखक उससे कहता है कि उसे बॉल खेलना नहीं आता तो श्रीधर उसकी इस बात पर ज़ोर से हँसता है।  
ख.  लेखक की माँ ने उसे श्रीधर के साथ बाहर जाने से मना कर दिया क्योंकि लेखक के घरवाले कभी भी उसे अकेले बाहर नहीं जाने देते थे। लेखक की माँ को इस बात का डर था कि अगर लेखक बाहर गया और इस बात की जानकारी लेखक के पिताजी को चल गई तो बड़ी समस्या पैदा हो सकती है।
ग.    लेखक अपने लॉन में ही गेंद फेंका करता था और उसका नौकर किसनू  झड़ियों में से पुनः गेंद लाकर लेखक को दिया करता था। इस प्रकार लेखक अपने खेलने की इच्छा पूरी करता था।
घ.    श्रीधर को देखकर लेखक को अपने ऊपर झुँझलाहट होती है क्योंकि श्रीधर भी उसी के उम्र का है पर वह उससे ज़्यादा वजन उठा सकता है, ज़्यादा ऊँचा उछल सकता है, उससे ज़्यादा ताकतवर है, उससे ज्यादा दूध पी सकता है।
ङ.   लेखक को अपनी माँ और चाँद की माँ में यह अंतर नज़र आता है कि उसकी माँ उसे अकेले कहीं भी नहीं जाने देती और चाँद की माँ इतने बड़े आकाश में चाँद को खुला घूमने के लिए छोड़ देती है।      
डायरी के पन्ने
2.     मौखिक उत्तर
क.  मेरे विचार से यह उचित नहीं है क्योंकि बच्चों के गलत व्यवहार पर यदि उन्हें न डाँटा जाए तो वे उद्दंड बन जाएँगे और आने वाले दिनों में समाज के साथ समायोजन नहीं कर पाएँगे।  
ख.  लेखक ने गेंद न खेल पाने की बात को अनाड़ीपन की श्रेणी में रखा। इसमें उसकी यह मज़बूरी होगी कि उसके घरवाले उसे खुला नहीं छोड़ते थे। मेरी कोई मजबूरी नहीं मुझमें कोई अनाड़ीपन नहीं।
ग.    एक बार जब भूलवश मैंने एक भद्र व्यक्ति के साथ अभद्र व्यवहार कर दिया था तो आत्मग्लानि के कारण मुझे रात को नींद नहीं आ रही थी।
घ.    मैं अपनी दादी, नानी, माँ-पिताजी के सलामती के लिए उन्हें स्वास्थ्य संबंधी जानकारियाँ देता रहता हूँ।
सलाह – मशविरा
1.     मैं लेखक के परिवारवालों को यह सलाह देना चाहूँगा कि वो लेखक का बचपन न छीनें। उसे खेल-कूद का पूरा अवसर दें। उससे उसकी इच्छा पूछी जाए और आवश्यकतानुसार उसे पूरा करने की कोशिश की जाए। ऐसा करने से ही बच्चे का चतुर्दिग विकास संभव हो पाएगा।   
2.     मैं अपने साथियों को अच्छी सेहत के लिए यह सलाह देना चाहूँगा की उन्हें पौष्टिक भोजन करना चाहिए, मौसम के अनुकूल फलों का सेवन करना चाहिए, प्रतिदिन व्यायाम, प्राणायाम और योग करना चाहिए।
आपकी अभिव्यक्ति
1.     जब मैं उदास होता हूँ तो अपनी डायरी निकालकर लिखना शुरू कर देता हूँ।
2.     मेरे विचार से इस पाठ के लिए ये दो शीर्षक रखे जा सकते हैं – वंचित बचपन और इकलौता बेटा

शब्दार्थ
1.     बेहद = बहुत ज़्यादा  
2.     एकाएक = अचानक
3.     उदासी = मायूस
4.     ताज्जुब = आश्चर्य
5.     अशिष्ट = अभद्र, indecent
6.     जलन = ईर्ष्या, डाह
7.     ढंग = तरीका
8.     साधारण = मामूली / Normal
9.     मजबूरी = बेबसी
10.                        कोठी = मकान
11.                        सोहबत = साथ, संग
12.                        निगाह = नज़र
13.                        कचहरी = अदालत / Court
14.                        तगड़ा = मज़बूत
15.                        इकलौता = केवल एक
16.                        काश = Wish
17.                        परवाह = फिक्र
18.                        मौज = मज़े-से  
19.                        झुँझलाहट = चिड़चिड़ापन

पर्यायवाची
1.     एकाएक = सहसा, अचानक, एकदम  
2.     ताज्जुब = आश्चर्य, हैरानी, भौंचक्का  
3.     अशिष्ट = अभद्र, अनैतिक, अमानवीय
4.     जलन = ईर्ष्या, डाह, द्वेष  
5.     मजबूरी = बेबसी, लाचारी, निरीहता
6.     कोठी = मकान, घर, आलय, निकेतन  
7.     सोहबत = साथ, संग, संगति   
8.     परवाह = फिक्र, चिंता, ख़्याल  

विलोम
1.     बेहद # हद 
2.     उदासी # खुशी 
3.     अशिष्ट # शिष्ट
4.     ढंग # बेढंग
5.     साधारण # विशिष्ट
6.     मजबूरी # इच्छा
7.     तगड़ा # कमज़ोर

उपसर्ग / प्रत्यय
1.     बेहद = बे + हद
2.     उदासी = उदास + ई
3.     अशिष्ट = अ + शिष्ट
4.     मजबूरी = मजबूर + ई
5.     झुँझलाहट = झुँझला + आहट