Hindi Language Promotion and Development: Kalash BY Avinash Ranjan GUpta

Sunday, 10 April 2016

Kalash BY Avinash Ranjan GUpta

कलश 

गजेंद्र सिंह सोलंकी  
1.  कवि मनुष्य को नींव का प्रस्तर अर्थात बुनियाद का पत्थर बनने को कह रहे हैं ताकि एक स्वच्छ, संबल और समर्थ राष्ट्र का निर्माण हो सके।
2.  कवि ने भगीरथ का उल्लेख किया है ताकि हमें यह ज्ञात हो सके कि हमारे पूर्वज कितने तेजोमय और महान थे जिन्होंने अपने अथक प्रयास से गंगा को पृथ्वी पर अवतरित कर दिया। अतः, हमें भी हमेशा अपने लक्ष्य को प्राप्त करने हेतु प्रयासरत रहना चाहिए।
3.  मानव के अस्तित्व को बनाए रखने के लिए हमें एकजुट होकर राष्ट्र के विकास के लिए कार्य करना होगा इसके लिए हमें चाहिए कि हम  समाज विरोधी तत्त्वों जैसे- जाति-वर्ण के भेद-भाव, स्वार्थ, द्वेष, क्लेश, ईर्ष्या का पूर्ण त्याग करें और स्वदेशी चीजों के प्रयोग पर अधिकाधिक बल दें।
4.  कवि ने हमें पुण्यात्मा महाराज सगर के वंशधर होने के गौरव को न भूलने की बात कही है क्योंकि इनके त्याग, धर्मपरायणता और सत्यनिष्ठा के कारण भारत का इतिहास गौरवमयी है।  कवि के अनुसार हमारी जीत तभी संभव हो सकेगी जब हम सार्वजनिक उपकार एवं लाभ के उद्देश्य से बिना हिम्मत हारे सफलता की प्राप्ति तक कार्य करते रहें।
5.  कवि के अनुसार हमारी जीत तभी संभव हो सकेगी जब हम सार्वजनिक उपकार एवं लाभ के उद्देश्य से बिना हिम्मत हारे सफलता की प्राप्ति तक कार्य करते रहें।




1.  कवि के अनुसार मनुष्य अपने आप को उन्नत बनाने के साथ-साथ दूसरों को खुशियाँ देना चाहता है, उनमें हिम्मत का संचार करना चाहता है और आपसी मनभेद को मिटा देना चाहता है।

2.  फ़ासलों को पास लाने के अर्थ है कि लोगों के बीच पनप रही कटुता और मनान्तर को मिटा देना।

3.  हर प्राण को खुशियाँ लुटानामें प्राणशब्द मनुष्य की ओर संकेत कर रहा है।

4.  जाह्नवी सिमटी जटाओं मेंपंक्ति के माध्यम से कवि यह कहना चाहते हैं कि कठिन परिश्रम और कर्मनिष्ठा से हर लक्ष्य को प्राप्त किया जा सकता है।

5.  मनुष्य का मस्तक तब ऊँचा होगा जब शिक्षा, स्वास्थ्य, स्वच्छता, संबल, सहिष्णुता और साहस से समस्त मानव जाति समर्थ होगी।

मौखिक उत्तर

1.  दूसरों के कष्टों, दुखों को दूर करने के लिए हमें स्वार्थ का त्याग कर परार्थ की भावना से काम करना चाहिए।

2.  मनुष्य यदि परिश्रम करे तो समाज में अनेक क्रांतिकारी परिवर्तन आ सकते हैं जैसे- बेरोजगारी और भूखमरी समूल नष्ट हो सकती है। समाज विकसित और आने वाले पीढ़ियों के लिए अनुकरणीय बन सकता है


1.  गृहकार्य

2.  मुझे अपना उज्ज्वल भविष्य  शिक्षकों द्वारा दी जाने वाली शिक्षा पर टिकी नज़र आती है क्योंकि अगर अभी मैं नींव रूपी शिक्षकों द्वारा दी जाने वाली शिक्षा को अच्छे-से न आत्मसात करूँ तो उज्ज्वल भविष्य रूपी भवन कभी भी खड़ा नहीं हो पाएगा।

3.  कविता कलशके माध्यम से कवि हमें यह बताना चाहते हैं कि सभी प्रकार की सुख-समृद्धि की एकमात्र कुंजी परिश्रम ही है।





प्रस्तर

कलश

मित्र

9

5

11

अस्तित्व

भगीरथ

साधना

1

10

12

खुशियाँ

पीर

निर्माण

6

8

7

उन्नत

ऊँचा

इधर

3

4

2