Hindi Language Promotion and Development: Dohe (Biharee Evam Raheem) By Avinash Ranjan Gupta

Monday, 18 April 2016

Dohe (Biharee Evam Raheem) By Avinash Ranjan Gupta



दोहे
बिहारी एवं रहीम
1.     बिहारी श्रीकृष्ण के उस मनोरम रूप-सौंदर्य को सदा के लिए अपने मन में बसाना चाहते हैं जब श्रीकृष्ण के सिर पर मुकुट, कमर में काछनी, हाथ में वंशी और हृदय पर वैजयंती माला धारण किए हों।
2.     स्वाति नक्षत्र से गिरने वाली बूँदें जब केले के पेड़ पर गिरती हैं तो चूना, साँप के मुख में गिरे तो कालकूट अर्थात विष और सीप में गिरे तो मोती बन जाती है।
3.     रहीम के अनुसार जो सचमुच बड़े होते हैं वो दूसरों की लघुताबोधक कथनों का बुरा नहीं मानते हैं जैसे श्रीकृष्ण ने इंद्र के कोप से लोगों की रक्षा हेतु गोवर्धन पर्वत को अपनी अँगुली पर धारण कर लिया था जिस वजह से वे गिरिधर कहलाते हैं पर कुछ लोग अज्ञानतावश उन्हें मुरलीधर कहते हैं जो पर्वत की तुलना में कितनी छोटी है।
4.     रहीम ने सज्जनों की तुलना मोतियों की माला से की है। रूठे हुए सज्जन व्यक्ति को मनाने की बात इस इसलिए कही गई है क्योंकि सज्जन व्यक्तियों के सान्निध्य से हमारा चतुर्दिग विकास होता है। वे हमारे जीवन को सही आयाम देने में मुख्य भूमिका निभाते हैं। 
5.     रहीम के अनुसार चाँद, केश, सहायता, स्नेह, पानी और मान बढ़ते-घटते रहते हैं।

खोज खबर
1.      
क.  दोहा संख्या – 9
ख.   दोहा संख्या – 3
ग.    दोहा संख्या – 8
घ.    दोहा संख्या – 6
2.    
क.  चन्दन कबहुँ न विष व्यापे  नहिं लिपटे रहे भुजंग॥
ख.  जोड़े से भी न जुड़े, जुड़े गाँठी परी जाय॥
ग.    रहिमन हीरा कब कहे, लाख टका महिं मोल॥
घ.    रहिमन मूलहिं सिंचिबौ, फूले-फले अघाय॥

शब्दार्थ
1.     सीस = सिर
2.     कटि = कमर
3.     काछनी = कमर में पहना जाने वाला काला धागा
4.     मुरली = वंशी
5.     बानिक = रूप
2
1.     सोहत = सुंदर लगना
2.     पीत = पीला
3.     पट = कपड़ा
4.     गात = शरीर
5.     मनो = मानो
6.     सैल = पर्वत, पत्थर
7.     आतप = सूर्य की किरणें
8.     प्रभात = सुबह
3
1.     कदली = केला
2.     भुजंग = साँप
3.     स्वाति = एक्स नक्षत्र
4.     गुन = गुण
5.     तैसोई = वैसा ही
4
1.     बड़ेन = बड़े लोग
2.     लघु = छोटा
3.     जाँही = जाना
4.     घटि = कम होना
5
1.     गति = ढंग
2.     कुल = वंश
3.     सोय = वही
4.     बारे = जलाना
5.     उजियारो = उजाला
6.     बढ़े = बंद होना, बड़ा होना
6
1.     सुजन = सज्जन
2.     फिरि-फिरि = बार-बार
3.     पोहिए = गूँथना
4.     मुक्ताहार = मोतियों की माला
7
1.     तासों = उनसे
2.     कछु = कुछ
3.     आस = आशा
4.     रीते = खाली
5.     सरवर = तालाब
6.     जाकी = जिसकी
8
1.     बिगरी = बिगड़ी
2.     बनै = बनना
3.     किन = उपाय
4.     फाटे = फटा
5.     माखन – मक्खन
9
1.     कोउ = कोई
2.     बिपति = विपत्ति
3.     सहाय = सहायक
4.     बिनु = बिना
5.     जलज = कमल
6.     रवि = सूर्य
7.     बचाय = बचाना
10
1.     ससि = चाँद
2.     सुकेस = अच्छे बाल
3.     सलिल = पानी
4.     सनेह = स्नेह, प्रेम
5.     सीम = सीमा

विलोम
1.     प्रभात # संध्या
2.     गुण # निर्गुण
3.     लघु # गुरु
4.     सज्जन # दुर्जन
5.     सलिल # अग्नि
पर्यायवाची
1.                             सीस = सिर, शीर्ष, मस्तक, भाल
2.                             मुरली = वंशी, बाँसुरी, वेणु 
3.                             पट = कपड़ा, चीर, कर्पट, वसन
4.                             गात = शरीर, देह, गात
5.                             प्रभात = सुबह, प्रत्युष, प्रातः
6.                             भुजंग = साँप, अहि, सर्प  
7.                             सरवर = तालाब, पोखरी, ताल
8.                             माखन – मक्खन, नवनीत
9.                             जलज = कमल, सरसिज, जलज
10.                        रवि = सूर्य, दिनकर, भास्कर
11.                        ससि = चाँद, राकेश, राका, इंदु
12.                        सलिल = पानी, जल, अंबु