Hindi Language Promotion and Development: DAV Bolani Geet By Avinash Ranjan Gupta

Sunday, 10 April 2016

DAV Bolani Geet By Avinash Ranjan Gupta

डी. ए. वी.  बोलानी गीत
                                     उत्कल की पावन भूमि पर हो गया ज्ञानोदय।                 
विद्यालय डी. ए. वी.  बोलानी सम विद्या भानूदय॥
कला ज्ञान का मेल यहाँ, सीख सबक का संगम,
जीवन में ज्योति भर दे हरकर अज्ञान का तम,
प्राणी की परिणति है यहाँ प्रयास, प्रयत्न, परिश्रम,
अटल रहेंगे सत के पथ पर प्रण लेते हैं हम।
उत्कल की पावन भूमि पर हो गया ज्ञानोदय।
विद्यालय डी. ए. वी.  बोलानी सम विद्या भानूदय॥
ज्ञान पुंज और कर्म कुंज का ये है अक्षय कोष,
दयानंद और हंसराज की वाणी का उद्घोष,
सत्य, अहिंसा और धर्म का पुण्य प्लावन पोष,
फैल गई है इस बगिया में सुख, शांति, संतोष।
उत्कल की पावन भूमि पर हो गया ज्ञानोदय।
विद्यालय डी. ए. वी.  बोलानी सम विद्या भानूदय।। 
आज की शिक्षा में वेदों की दीक्षा का विलय,
लोभ, मोह और भेद-भाव का अब न कोई भय,
जन सेवा ही बन गया हो जिसका जीवन लय,
ऐसी विद्या की बगिया की बोलो जय जय जय।
उत्कल की पावन भूमि पर हो गया ज्ञानोदय।
विद्यालय डी. ए. वी.  बोलानी सम विद्या भानूदय॥

अविनाश रंजन गुप्ता