Hindi Language Promotion and Development: Asal Dhan By Avinash Ranjan Gupta

Sunday, 10 April 2016

Asal Dhan By Avinash Ranjan Gupta

पाठ में से
1.  दारा अपना पुराना समय याद रखता था। हाँ
2.  ईरान का शाह पैसों के बजाय बुद्धिमत्ता को महत्त्व देता था। हाँ
3.  दरबारी दारा को सम्मान की नज़र से देखते थे। नहीं
4.  ईर्ष्या में मनुष्य दूसरे व्यक्ति में दोष ढूँढ़ने लगता है। हाँ
5.  ईरान का शाह कान का कच्चा था। हाँ
प्रश्नोत्तर
1.  दारा अति सरल और ईमानदार व्यक्ति था। भौतिक चीजों के प्रति उनका थोड़ा भी रुझान न था। दारा तीक्ष्ण बुद्धिवाला व्यक्ति था जो गाँववालों की समस्या चुटकी में सुलझा दिया करता था। उनके इन्हीं सब गुणों के कारण गाँववाले उनका सम्मान किया करते थे।
2.  दारा के राज-दरबार का सदस्य बनते ही कुछ ही समय में उसने अपनी बुद्धि के बल पर राज्य की अनेक समस्याओं को हल कर दिया। फलस्वरूप, दारा शाह का चहेता बन गया और अन्य दरबारी की इज्ज़त शाह की नज़रों में कम हो गई। इस वजह से दरबारी दारा से जलने लगे।
3.  दारा प्रांत के अनेक स्थानों का दौरा घोड़े पर सवार होकर करता था। दौरा करते समय उसके साथ एक और घोड़ा भी होता था जिसके पीठ पर एक बड़ा-सा बक्सा रखा रहता था।
4.  दरबारियों ने दारा के खिलाफ़ शाह के कान भरने के लिए उनसे यह कहा कि दारा जब दौरे पर जाता है तो अपने साथ दूसरे घोड़े पर एक बक्सा भी रखता है जिसमें वे मासूम जनता से लूटा हुआ धन रखता है। दारा आपके दिए हुए अधिकारों का अनुचित लाभ उठा रहा है।
5.  दारा निहायती शरीफ़ और ईमानदार व्यक्ति था। बुद्धिमत्ता के बल पर उसे राज-दरबार में उच्च पद प्राप्त हुआ था। परंतु पद और मान-सम्मान की चकाचौंध में वह कहीं अपना अतीत और उद्देश्य न भूल जाए इसलिए हमेशा अपने साथ एक बक्से में भेड़ की ऊन से बना हुआ एक पुराना कोट रखा रहता था जो उसे उसकी गरीबी के दिन याद दिलाते रहते थे।

 


प्रश्नोत्तर
1.  पाठ का शीर्षक असल धनरखा गया है क्योंकि लेखक को यह भली-भाँति ज्ञात है कि चरित्र, सदाचरण और ईमानदारी ही सही मायने में किसी भी व्यक्ति का असल धन होता है।
2.  मुख्य पात्र के आधार पर मैं इस कहानी का नाम दारा की सच्चाईरखूँगा।  मुख्य घटना के आधार पर मैं इस कहानी का नाम सच्चा-झूठारखूँगा। कहानी का अंत / मुख्य संदेश पात्र के आधार पर मैं इस कहानी का नाम सच्चाई की जीतरखूँगा।
3.  दारा बनाम दरबारीक्योंकि इसमें मुख्य भूमिका दारा और अन्य दरबारी ही निभाते हैं।     ‘दारा की दिलेरीक्योंकि विषम परिस्थितियों में भी दारा विचलित नहीं हुआ और अपनी ईमानदारी सिद्ध कर दी।

 


कहानी के बहाने
1.  गृहकार्य
2.  शाह का शासन वंशानुक्रमिक होता है अर्थात शाह का बेटा शाह के बाद ईरान की शासन व्यवस्था संभालेगा जबकि लोकतांत्रिक व्यवस्था में आम जनता मतदान के माध्यम से अपना प्रतिनिधि खुद चुनती है। लोकतांत्रिक व्यवस्था में संविधान की भी व्यवस्था होती है।
3.  मैं अपनी किताबों को अपने पास रखना चाहूँगा क्योंकि जब भी मैं इन्हें खोलूँगा मुझे पुरानी बातें याद आएँगी और कुछ सीखने को भी मिलेगा।

प्प
पू
पु
ला
ना
बा
धा
स्वी
का
ना
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