Hindi Language Promotion and Development: Acche Padosi Ke Gun By Avinash Ranjan Gupta

Monday, 18 April 2016

Acche Padosi Ke Gun By Avinash Ranjan Gupta



अच्छे पड़ोसी के गुण
गोपाल चतुर्वेदी
1.     हाँ या नहीं में उत्तर दीजिए
क.  लेखक अपने पड़ोसी की पत्नी की बीमारी के बारे में काफ़ी चिंतित रहते थे। हाँ
ख.  तूश के शॉल पर चटनी का दाग लगने की वजह से लेखक की पत्नी बहुत परेशान थीं।  हाँ
ग.    लेखक पड़ोसी के केबल का तार काट देते थे। हाँ
घ.    पड़ोसियों के बीच चाय की पत्ती, प्याज़, साड़ी आदि का लेन-देन होता रहता है।  हाँ
ङ.   लेखक और उनके पड़ोसी अपने घर का कूड़ा-करकट एक दूसरे के घर के पास फेंक देते थे। नहीं  

1.     लेखक पड़ोसी के केबल का तार काटने को सही ठहराने के लिए दलीलें पेश करते हुए कहते हैं कि केबल में आने वाले कार्यक्रम बच्चों के कोमल मस्तिष्क पर बुरा प्रभाव डालते हैं। बच्चे इन कार्यक्रमों को देखने के इतने आदी हो जाते हैं कि अपनी पढ़ाई तक का नुकसान कर लेते हैं, लगातार टी.वी. देखने से उनकी आँखें भी कमजोर हो जाती हैं।
2.     महिलाएँ पड़ोसी धर्म निभाने का सिलसिला चीनी और चाय की पत्ती से शुरू करती हैं।
3.     लेखक ने व्यक्ति और देश के पड़ोसियों की तुलना की है क्योंकि जिस प्रकार एक व्यक्ति भला मानुष और हमारा शुभचिंतक होने का दिखावा करता है ठीक उसी प्रकार हमारे देश के पड़ोसी देश भी हमारे देश के आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप न करने का वादा करते हैं लेकिन  गुप्त रूप से हमारे देश में घुसपैठिए भेजकर असामाजिक गतिविधियों को अंजाम देकर खौफ़ और आतंक का माहौल पैदा करते हैं।
4.     पड़ोसियों के बीच अधिकतर सामान्य बातों को लेकर बहस होती है जैसे- कूड़े-कचरे का इधर-उधर फेंका जाना, पड़ोसी को दिए गए चीजों के बदले ख़राब चीजों का प्राप्त होना या ख़राब अवस्था में मिलना।
5.     तूश एक प्रकार का कीमती ऊन होता है। इस पाठ में एक पड़ोसी दूसरे पड़ोसी से किसी पार्टी में जाने के लिए तूश का शॉल माँगता है। दुर्भाग्यवश उस शॉल में चटनी का दाग लग जाता है। जब इस बात की जानकारी शॉल के मालिक को चलती है तो वह यह मानता है कि ईर्ष्या और स्पर्धा के कारण उसने ऐसा जान-बुझकर किया है जिसका कारण पुरानी चाय और प्याज़ की लेन-देन है।

1.     पड़ोसियों में अधिकतर खाने-पीने के सामान, गाड़ी, किताबें, बर्तन और बिजली से चलने वाले उपकरणों का लेन-देन होता है।
2.     एक बार जब मेरे पड़ोसी को आधी रात के समय साँप ने काट लिया था तब मैंने पड़ोसी धर्म निभाते हुए उनको अस्पताल तक पहुँचाया और आर्थिक मदद भी की थी।
3.     युद्ध में जब किसी भी प्रकार की हिंसात्मक गतिविधि न हो केवल एक दूसरे के प्रति अहित का भाव हो तो उसे शीत युद्ध कहते हैं। मेरा कभी भी किसी के साथ शीत युद्ध नहीं हुआ है।

किस्म
जिज्ञासा
जीवन
दाल
दीवाली
व्यवहार
शाश्वत
सद्भावना
सोहार्द
स्वाभाविक

क.  हम इस महान नारी के जीवन की तारीफ करते नहीं थकते।
ख.  हमें साधारण सर्दी-ज़ुकाम भी हो जाता तो वे हमें सावधान करते।
ग.    पत्नी के रुख से हमारे पड़ोसी-प्रेम में कोई बदलाव नहीं आया है।
घ.    ऐसे सहयोग और सोहार्द के बिना पास-पड़ोस का जीवन दुखद होने का खतरा है।

शब्दार्थ