Hindi Language Promotion and Development: Aashram Ke Atithi Our Sansmaran By Avinash Ranjan Gupta

Monday, 18 April 2016

Aashram Ke Atithi Our Sansmaran By Avinash Ranjan Gupta



आश्रम के अतिथि और संस्मरण
डॉक्टर प्रभाकर माचवे

पाठ में से
1.     प्रश्नोत्तर
क.  गांधीजी ने सिला हुआ कपड़ा पहनना छोड़ दिया क्योंकि वे स्वदेशी आंदोलन के पुरोधा थे और उस समय सुई का निर्माण भारत में नहीं हुआ करता था।
ख.  गांधीजी किसी भी चीज़ के अधिकतम उपयोग पर बल देते थे इसलिए उनके आश्रम में जितनी भी चिट्ठियाँ, लिफ़ाफ़े या तार आते तो उनके कोरे अंशों को वे उपयोग के लिए सँभालकर रख किया करते थे।
ग.    गांधीजी ने नास्तिक नौजवान को समझाया कि भगवान को लेकर अलग-अलग धर्मों में अलग-अलग मान्यताएँ हैं पर सच तो यह है कि हर मनुष्य में ईश्वर हैं और उनके प्रति अहिंसक और प्रेम भावना से रहने से ही ईश्वर की प्राप्ति संभव है।
घ.    आत्मशुद्धि के लिए उपवास रखना और लेख लिखने का कारण यह था कि गांधीजी यह मानते थे कि पहले आचरण फिर उपदेश अर्थात् वे आश्रम में किसी भी भूल के लिए सबसे पहले खुद को ज़िम्मेदार ठहराते थे और प्रायश्चित स्वरूप उपवास रखते और लेख के रूप में अपने अनुभव लिखा करते थे।
ङ.   गांधीजी ने आश्रम में रहने वाली बहनों को बघार लगाकर और मसाला डालकर सब्ज़ी खाने की अनुमति दे दी क्योंकि उबले हुए कद्दू खाकर किसी बहन को बादी हो गई थी, किसी को चक्कर आने लगे थे और किसी को डकारों के मारे चैन नहीं था।
पाठ के बहाने
1.     पाठ के अंश
क.  जब गांधीजी मौलाना अबुल कलाम आज़ाद के आने की तैयारियाँ अपने आश्रम में कर रहे थे।
ख.  जब उन्होंने मनोहर दीवान से पूनियाँ लपेटने के डोरे के बारे में पूछा और तार, चिट्ठियों और लिफ़ाफ़े के कोरे अंशों को सँभालकर रखना
ग.    जब उन्होंने आश्रम की बहनों को सब्ज़ी में बघार लगाकर और मसाले डालकर खाने की अनुमति दे दी।  
2.     गांधीजी विदेशी सामान के प्रयोग के पक्ष में नहीं थे क्योंकि विदेशी सामानों का प्रयोग करने से भारत के पैसे विदेश चले जाते थे जिससे भारत की आर्थिक स्थिति चरमरा गई थी। उनका यह मानना था कि भारत को सबसे पहले आर्थिक स्वतंत्रता प्राप्त करनी होगी जो केवल स्वेदेशी चीजों से ही संभव है।

समझ की बात
1.     कथनों को समझाइए
क.  गांधीजी जो कहा करते थे उसे अपने जीवन में भी उतरते थे। वे अपने आश्रम के साथ-साथ देश के सभी लोगों को ध्यान में रखकर उनके विकास के लिए काम किया करते थे। इसलिए उन्हें केवल उपदेशक नहीं कर्मयोगी भी कहा जाता है।
ख.  जब कोई व्यक्ति भ्रष्टाचार के कीचड़ में पैर रखता है तो उसके दाग लाख कोशिश करने के बावजूद भी नहीं छूटते जिसके कारण वह अपने व्यक्तिगत जीवन में भी परेशान रहने लगता है और उससे जुड़े लोगों को भी नाना प्रकार की समस्या आती रहती है।
ग.    गांधीजी का यह मानना था कि आप आस्तिक बनें या नास्तिक परंतु कोई शक्ति तो ज़रूर है जो इस दुनिया को चला रही है और अगर आप उस शक्ति के प्रति अपनी श्रद्धा रखना चाहते हैं तो इस दुनिया के सभी प्राणियों के प्रति प्रेम और अहिंसा की भावना रखनी चाहिए।
अनुमान और कल्पना
1.     मौखिक उत्तर
क.  छगनलाल जोशी ने हिसाब में गड़बड़ी वाली बात इसलिए छिपाई होगी क्योंकि वे अपने चाचा गांधीजी को इतनी कम राशि के लिए परेशान नहीं करना चाहते होंगे।
ख.  गांधीजी ने आत्मशुद्धि के लेख में कस्तूरबा की कड़ी आलोचना की होगी और भविष्य में ऐसा न हो उसके लिए कुछ रणनीतियाँ भी तय की होंगी।
ग.    आश्रमवासी गांधीजी से शिकायत करने की हिम्मत नहीं करते होंगे क्योंकि हो सकता है उनके प्रस्ताव में कुछ कमियाँ होंगी।
घ.    गांधीजी ने ऐसा कहा होगा क्योंकि अगर बच्चे ज़्यादा मसले वाले सब्ज़ी  खाएँगे तो उनके स्वास्थ्य पर बुरा असर पड़ेगा।
आपकी अभिव्यक्ति
1.     जब मुझसे कोई गलती हो जाती है तो यथासंभव प्रयास कर कर मैं उसे सुधारने का प्रयास करता हूँ और जब स्थिति मेरे नियंत्रण से बाहर हो जाती है तो मैं अपने माता-पिता से सबकुछ सही-सही और सच-सच बता देता हूँ।
2.     किसी विशेष घटना
क.  एक बार जब मैंने अनजाने में एक व्यक्ति से साथ बुरा व्यवहार कर दिया था तो मुझे बहुत बुरा लगा और मैंने प्रायश्चित के लिए एक दिन का उपवास रखा था।
ख.  छात्रावास में रहने के दौरान जब मुझे एक बार सब्ज़ी अच्छी नहीं लगी तो मैंने रसोइए से शिकायत करते हुए यह कहा था कि हमारे अच्छे अंक आपके ऊपर ही निर्भर है अगर आप अच्छा खाना नहीं बनाएँगे तो हमारी भूख अच्छे-से नहीं मिटेगी और भूख अच्छे-से नहीं मिटेगी तो पढ़ाई में मन नहीं लगेगा और अगर पढ़ाई में मन नहीं लगेगा तो हमारे अंक कम आएँगे।
3.     करेला, नीम के पत्ते, काढ़ा इत्यादि सेहत के लिए बहुत ही गुणकारी हैं परंतु इनका  सेवन जायकेदार नहीं है।
4.     गृहकार्य
5.     मैं अपनी छोटी-छोटी चीजों को उनके अहमीयत के हिसाब से सँभालकर रखता हूँ।
पढ़ने के तरीके
1.     खाली स्थान
क.  आश्चर्य
ख.  प्रबंध
ग.    माफ़
घ.    मदद
2.     अहिंसा = (स्त्रीलिंग) शांति का मार्ग
आश्रम = (पुल्लिंग) धर्मशाला
कैंची = (स्त्रीलिंग) कपड़े काटने का एक औज़ार
चटपटी = (स्त्रीलिंग) मसालेदार
पुराना = (पुल्लिंग) जो नया न हो
बघार = (पुल्लिंग) छोंकना
बढ़ई = (पुल्लिंग) लकड़ियों से चीज़ें बनाने वाला
बाज़ार = (पुल्लिंग) हाट
सजीव = (पुल्लिंग) जीवित
सत्य = (पुल्लिंग) सच


शब्दार्थ
1.                             आश्रम = धर्मशाला
2.                             अतिथि = मेहमान
3.                             संस्मरण = याद
4.                             कुटी = Hut
5.                             फर्श = Floor
6.                             तिपाई = Tripod
7.                             सकोरा = मिट्टी से बनी कटोरी
8.                             अचरज = आश्चर्य
9.                             राखदानी = Ashtray
10.                        जीवन पद्धति = life style
11.                        अड़चन = बाधा
12.                        ढंग = तरीका
13.                        स्वराज्य = आज़ादी
14.                        अपव्यय = फिज़ूल खर्च
15.                        स्वदेशी = indigenous
16.                        बढ़ई = Carpenter
17.                        औजार = Tools
18.                        सजीव प्रतिकृति = True copy
19.                        कोठार = गोदाम
20.                        आत्मशुद्धि = Self-purification
21.                        उपवास = Fast
22.                        सख़्ती = कड़ाई
23.                        आलोचना = Criticism
24.                        गुस्सा = क्रोध
25.                        पाप = Sin
26.                        दोष = आरोप
27.                        भ्रष्टाचार = Corruption
28.                        प्रायश्चित = repent
29.                        शिकायत = Complain
30.                        बघार = तड़का
31.                        मंजूर = स्वीकार
32.                        ताना = उलाहना
33.                        पोल खोलना = रहस्य का उद्घाटन करना

पर्यायवाची
1.     आश्रम = धर्मशाला, सराय 
2.     अतिथि = मेहमान, पाहून, आगंतुक 
3.     संस्मरण = याद, स्मृति, ख्याल
4.     अचरज = आश्चर्य, हैरानी, ताज्जुब 
5.     अड़चन = बाधा, मुश्किल, मुसीबत 
6.     ढंग = तरीका, लहजा, प्रकार 
7.     प्रायश्चित = पश्चाताप, खेद  

विलोम
1.                             अतिथि # तिथि
2.                             स्मरण # विस्मरण
3.                             कुटी # महल  
4.                             फर्श # छत  
5.                             अड़चन # सुविधा  
6.                             ढंग # बेढंग  
7.                             अपव्यय # व्यय
8.                             स्वदेशी # विदेशी
9.                             सख़्ती # नरमी  
10.                        आलोचना # प्रशंसा
11.                        गुस्सा # प्यार
12.                        पाप # पुण्य
13.                        दोष # निर्दोष  
14.                        शिकायत # तारीफ़
15.                        मंजूर # नामंजूर

उपसर्ग / प्रत्यय
उपसर्ग
1.     आश्रम = आ + श्रम
2.     अतिथि = अ + तिथि
3.     संस्मरण = सम् + स्मरण
4.     स्वराज्य = स्व + राज्य
5.     अपव्यय = अप + व्यय
6.     उपवास = उप + वास
7.     विश्वास = वि + श्वास
8.     विदेश = वि + देश

प्रत्यय
9.     सख़्ती = सख़्त + ई