Hindi Language Promotion and Development: Aapka Jeevansathi By Avinash Ranjan Gupta

Thursday, 21 April 2016

Aapka Jeevansathi By Avinash Ranjan Gupta

प्रेमी, विवाह के इच्छुक और विवाहितों के लिए
स्कूल में भावना जगी, आई. ए. में शुरुआत होने लगी,
बी.ए. में कुछ प्रसंग हुए, कुछ जमे कुछ भंग हुए,
एम.ए. में मामला गहराया और अंत में अनुभव आया।
          प्रिय पाठकों इस लेख में मैं आपको यह बताने वाला हूँ कि किस तरह आप अपने लिए सही जीवनसाथी का चुनाव कर सकते हैं या आपने अगर अपने जीवनसाथी का चुनाव कर लिया है तो किस प्रकार अपने वैवाहिक जीवन के रिश्तों को मधुर बनाएँगे और अगर आप विवाह के बंधन में बँध चुके हैं तो किस प्रकार विवाह के पवित्र सूत्र को और भी मजबूत बनाएँगे ताकि आपका जीवन मधुमय हो जाए। परंतु साथ ही साथ मैं यह भी घोषणा करता हूँ कि मेरा यह लेख उन लोगों के लिए हितकर साबित नहीं हो सकता जो गलत मोह में पड़ गए हैं क्योंकि जो गलत मोह में पड़ जाता है उन पर प्रभु के सुवचनों का भी कोई असर नहीं होता रावण, दुर्योधन, हिरण्यकश्यप इसके ज्वलंत उदाहरण हैं।
          सबसे पहले तो मैं आपको एक कड़वे सच से रू-ब-रू करवाना चाहता हूँ कि आज के युग में चरित्र, व्यवहार और आचरण (लड़कियों के लिए) उतने मायने नहीं रखते जितना कि पावर, पोस्ट और पोजीशन। यदि आप कुरूप हैं शरीर और चरित्र दोनों से परंतु आप लक्ष्मी के लाडले हैं तो एक सुंदर लड़की से आपके विवाह हो जाने की संभावना बहुत है। लड़कों का लड़कियों के प्रति दृष्टिकोण कुछ अलग है। वे शादी के लिए एक ऐसी लड़की चाहते हैं जो उसके साथ साथ उसके घरवालों को भी सँभाल ले और वंश को आगे बढ़ाने के लिए होने वाले बच्चों की एक अच्छी माँ साबित हो सके। परंतु डेटिंग और पार्टी के लिए उन्हें खुले विचारों वाली ही लड़कियाँ समझ में आती हैं ऐसा क्यों होता है इसका अंदाज़ा आपको भली-भाँति होगा।  
          जैसा कि मैंने ऊपर ही कहा है कि वो ज़माना लद गया जब अच्छे और चरित्रवान वरों की खोज की जाती थी। आज का समीकरण बिलकुल उल्टा हो गया है। आज ऐसे वरों की तलाश की जाती है जो पावर, पोस्ट और पोजीशन में ऊपर हो और अगर वह चरित्रवान भी हो तो सोने पे सुहागा वाली कहावत सच हो जाती है। मैंने ऊपर यह भी कहा है कि लगभग हर वर अपने लिए कैसे जीवनसाथी की कामना करता है और सच कहूँ तो ऐसे जीवनसाथी आज के दौर में हाइली एक्सक्लूसिव (Highly Exclusive) हो चुकी है जिसे पाने के लिए आपको अपने अंदर विशिष्ट गुणों का संचार करना होगा। इसके लिए आपको सचमुच पावर, पोस्ट और पोजीशन में ऊपर उठना होगा और अगर आप ये  सब पाने में सफल हो जाते हैं तो एक बार इस बात को ज़रूर याद करना कि स्पाइडर मैन फिल्म में पीटर ने क्या कहा था? उसने कहा था, “ बड़ी ताकत के साथ बड़ी जिम्मेदारियाँ भी आती हैं।” और मुझे पूरा विश्वास है कि अपने जीवन को सफल बनाने के साथ-साथ अपने पावर, पोस्ट और पोजीशन के माध्यम से आप दूसरों के जीवन को भी सफल बनाए के लिए ज़रूर काम करेंगे।
          अगर आप प्रेम में हैं और प्रेम से जुड़ी कभी कोई समस्या आ जाती है तो कभी भी देवदास का अनुकरण न करें। मैं जानता हूँ कहना आसान है पर करना बहुत मुश्किल। मगर क्या आप आसान काम करना चाहेंगे? नहीं न। आपका नाम दूसरों की ज़ुबान पर तभी आता है जब आप किसी कठिन काम को पूरा कर कर सफलता प्राप्त करते हैं। विश्वास कीजिए कोई भी लड़की ऐसे लड़के को ही अपने जीवनसाथी के रूप में स्वीकार करना चाहती जिसमें पुरुषार्थ की कमी न  हो। इसके विपरीत अगर आप देवदास बन जाते हैं तो आप दया के पात्र बन जाते हैं। अंग्रेज़ी का एक वाक्य है,I have fallen in love” अर्थात् मैं प्यार में पड़ चुका हूँ। आप लोगों को मेरी नसीहत है कि कभी भी प्यार में गिरिए मत। कुछ भी ऐसा काम मत कीजिए जो आज के पढ़े-लिखे बेवकूफ़ युवा करते नज़र आते हैं। आपका वाक्य होना चाहिए  I have Risen in love” अर्थात् मैं प्यार में उठ चुका हूँ। क्योंकि अब आप एक नहीं दो हो गए हैं और वो प्रेम प्रेम ही क्या जिससे किसी का उपकार न हुआ जिससे किसी को  प्रेरणा ही न मिले।अब आप सोचिए आपने अभी तक क्या किया है?
          आज कल के युवावों से मैं यह कहना चाहूँगा कि कोई भी लड़की उसे ही पसंद करती है जो अपने सभी काम को सही तरीके से पूरा करता है अपने काम को प्राथमिकता देता है। ठीक इसके विपरीत आज के युवा अपना सारा काम छोड़कर लड़की के एक फोन कॉल पर उसके पास पहुँच जाते हैं। धीर-धीरे उन्हें चिपकू की संज्ञा मिलती है और अंत में वे न प्रोफैशनल करियर में ही कुछ हासिल कर पाते हैं और न ही अपनी नज़र में सम्मानजनक स्थान। लड़कियाँ सदा से अपने वर के रूप में एक ऐसे पुरुष का चुनाव करना चाहती हैं जो पढ़ाई-लिखाई, बात-व्यवहार, आचरण और मैच्यूरिटी में उससे कहीं ज़्यादा हो। इसीलिए तो शकुंतला ने दुष्यंत का, सीता ने राम का, रुक्मिणी ने जयद्रथ के बदले कृष्ण का और द्रौपदी ने कर्ण के बदले अर्जुन का चुनाव किया था। अब मुझे पूरा यकीन हो गया है कि आपकी आँखें खुल गई होंगी।
          अगर मेरी इन बातों से भी आप सहमत नहीं है तो वे युवा जो लड़कियों के पीछे घूमते रहते हैं, उनपर कमेंट करते हैं, बिना बोले ही लड़कियों के लिए कुछ करते रहते हैं ऐसे लड़कों को लड़कियाँ पसंद नहीं करती हैं। वे उन्हें बंदर मानती हैं। लड़कियाँ उन लड़कों को पसंद करती हैं जो अपने काम के प्रति निष्ठावान होते हैं यहाँ तक कि अपने काम के लिए उन्हें भी अटैंशन नहीं देते। उदाहरण  के लिए हम जब भी कोई चिड़ियाघर जाते हैं तो  हम सबको शेर को देखने की ही इच्छा होती है। शेर अपने आपको लोगों को दिखाने के लिए बाहर नहीं आ जाता, अगर वह अपने पिंजरे के अंदरूनी भाग में भी होता है तो लोग उसके निकलने का इंतज़ार करते हैं पर बंदरों को कभी भी कोई पूरी तन्मयता से नहीं देखता है बल्कि बंदर ही लोगों को देखकर उछलने लगता है। अब आपको तय करना है कि आप अपने जीवन में शेर जैसा सम्मान पाना चाहते हैं या बंदरों जैसा उपहास।
          अगर आप अपने जीवनसाथी का चुनाव कर रहे  हैं या विवाह के बंधन में बँधने की तैयारियों में जुटे हुए हैं तो आपने अपने मन लायक जीवनसाथी का जो सुंदर चित्र अपने मन खींच कर रखा हुआ है हू-ब-हू वैसी चित्र वाली कन्या तो आपको मिलने से रही क्योंकि उस कन्या ने भी अपने मन में कुछ ऐसे ही सुंदर चित्र खींचे होंगे जो शत-प्रतिशत एक दूसरे के चित्र से कभी भी मेल नहीं खाएँगे।  ऐसे में आप दोनों को थोड़ा समायोजन (Adjustment) करना पड़ेगा। पर ध्यान देने वाली बात यह है कि समायोजन (Adjustment) वाली स्थिति तो ठीक है पर जब रिश्ते को समझौते (Compromise) की तर्ज़ पर आगे बढ़ना पड़े तो आपका वैसे रिश्ते को बनाने का कोई मतलब ही नहीं निकलता है।  
          अगर आप विवाह के बंधन में बँध चुके हैं तो आपको इस बात का अंदाज़ा हो ही गया होगा कि आपके और उसके व्यवहार में बहुत जगह असमानताएँ रहती हैं मान लीजिए कि अगर कभी भी किसी चीज़ के लिए आपकी वाइफ़ ने डिमांड कर दी तो उसे एकदम से ख़ारिज़ मत कीजिए। उससे कहिए, “हाँ, ज़रूर मैं आपकी डिमांड पूरी करूँगा।” अगर आपके पास पैसे की कमी है तो समय के साथ- साथ उसे भी इस बात का अंदाज़ा हो जाएगा और विश्वास मानिए वो ज़िद करना खुद छोड़ देगी। कभी-कभी यही असमानताएँ विवाद का कारण बन जाते हैं। ऐसे में आपको चाहिए कि आप थोड़ा दब जाएँ (पुरुष वर्ग) और जब मामला शांत हो जाए तो प्यार से अपनी पत्नी को समझाने की कोशिश करें क्योंकि औरतें प्यार की भाषा ही समझती हैं। हालाँकि ये ज़रा जटिल  काम है पर मुझे पूरा विश्वास है कि आप इस काम को पूरा करने में सफल हो जाएँगे और बाद में आपको इसकी आदत भी पड़ जाएगी क्योंकि अगर आप ऐसा नहीं करेंगे तो भविष्य में आपको ही समस्याओं का सामना करना पड़ेगा। क्योंकि जब स्त्रियाँ रोना शुरू करतीं हैं तो भूकंप से भी बड़ा प्रलय आता है और आपको धारा 498 (A) के बारे में तो पता ही होगा अगर नहीं है तो आपको जान लेना चाहिए क्योंकि ये धारा स्त्रियों के लिए किसी ब्रह्मास्त्र से कम नहीं।
          अंत में यही कहना चाहूँगा कि किसी भी रिश्ते की मज़बूती के लिए एक-दूसरे के प्रति सम्मान, विश्वास और अहमियत का होना परम आवश्यक है। इन्हीं के अभाव में रिश्तों में दरार पड़ जाती है। आपको चाहिए कि आप हर संभव प्रयास करके इन गुणों को अपने अंदर संचार करें। सकारात्मक नतीज़े आपका इंतज़ार कर रहे हैं।  
इस लेख को लिखने वाले अविनाश रंजन गुप्ता  डी. ए. वी.  पब्लिक स्कूल बोलानी में शिक्षक हैं।