Hindi Language Promotion and Development: Bahu Ki Vida By Avinash Ranjan Gupta

Wednesday, 9 December 2015

Bahu Ki Vida By Avinash Ranjan Gupta

शब्दार्थ
1.     आधुनिक – Modern
2.     पर्दा – यवनिका / Curtain
3.     समीप – नज़दीक
4.     निर्णय – फ़ैसला
5.     मज़बूर – बेबस
6.     दहेज़ – Dowry
7.     सामर्थ्य – योग्यता
8.     खातिर – के लिए
9.     करारी – गहरी
10. घाव – Wound
11. मरहम – लेप औषधि
12. नकद – Cash
13. सरासर – एकदम
14. शिकायत – निंदा
15. बदतमीजी – अशिष्टता
16. खातिरदारी – मेहमाननवाज़ी
17. दंग रह जाना – आश्चर्य रह जाना
18. दांतों तले अँगुली दबाना – आश्चर्य रह जाना
19. तराज़ू – Balance
20. ज़िद – हठ
21. विनती – प्रार्थना
22. व्यर्थ – बेकार
23. कलेजा – हृदय
24. ब्याह – शादी
25. मूर्ति – प्रतिमा
26. धातु – Metal
27. तिजोरी – Safe
28. नकटा – नाक कटा हुआ
29. लोभी – लालची
30. नज़र – दृष्टि
31. उलझन – परेशानी
32. लज्जित – शर्मिंदा
33. ताक – देख








पाठ में से
1.     प्रमोद तेईस वर्ष का सीधा-सादा युवक है। वह अपनी नव-विवाहिता बहन कमला की विदाई करवाने उसके ससुराल आया है।   
2.     जीवनलाल ने कमला को विदा करने से मना कर दिया क्योंकि उन्हें लगता था कि प्रमोद ने न तो तय की हुई दहेज़ की राशि उन्हें दी और न ही बारातियों की खातिरदारी अच्छे से की।   
3.     गौरी विदा होकर नहीं आई थी क्योंकि उसके ससुराल वालों का यह कहना था कि जीवन लाल ने दहेज़ की पूरी रकम नहीं दी है।  
4.     राजेश्वरी ने जीवन लाल को शराफत और इंसानियत की सही परिभाषा समझाते हुए यह बताया कि बहू और बेटी में कोई अंतर नहीं है। 
5.     एकांकी में जीवन लाल जिस मरहम की बात करते हैं वो दहेज के पाँच हज़ार रुपए हैं जिसे वे कमला के भाई प्रमोद से वसूलना चाहते हैं। उन्हें यह मरहम नहीं मिल पाता क्योंकि ऐसा ही मरहम उनकी बेटी गौरी  के ससुराल वाले उनसे चाहते थे।

आपकी बात
1.     राजेश्वरी – हँसमुख, संवेदनशील, स्नेही, स्पष्टवादी, व्यवहारकुशल, विवेकी, कोमलहृदय। इन सब गुणों का प्रयोग राजेश्वरी के लिए करना उचित है क्योंकि  वह एक आदर्श नारी है।
जीवन लाल - गुस्सैल, घमंडी, लोभी, कठोरहृदयी।  इन दुर्गुणों का प्रयोग जीवन लाल के लिए किया जाना उचित है क्योंकि प्रमोद के साथ उनका व्यवहार उनके आचरण और चरित्र का स्पष्ट चित्रा अंकित करता है।
2.     दहेज लेन-देन की गलत प्रथा के लिए मैं उन माता-पिता को दोषी मानता हूँ जो लाखों रुपए अपनी बेटी के दहेज़ के लिए संचित करते हैं परंतु उतने पैसे उसकी पढ़ाई-लिखाई में खर्च नहीं करते जिसकी वजह से वर-पक्ष दहेज की माँग कर बैठते हैं। अगर हम दहेज़ प्रथा को समूल नष्ट करना चाहते हैं तो हमें शिक्षा और विद्या का ज़्यादा से ज़्यादा प्रचार-प्रसार ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में करना होगा।  
समझ की बात
1.      
क.   प्रस्तुत कथन का अर्थ यह है कि हम उस समय तक दूसरों की पीड़ा का अनुभव नहीं कर सकते जब तक हमें वैसी पीड़ा न हो। इस पाठ में भी जीवन लाल ने प्रमोद के साथ कठोर व्यवहार किया बिना यह जाने कि प्रमोद को कितना कष्ट होता होगा।  उन्हें प्रमोद के कष्टों का अनुभव उस समय हुआ जब गौरी अपने ससुराल से विदा होकर नहीं आई।
ख.   प्रस्तुत कथन में यह बात स्पष्ट हो जाती है कि यहाँ गर्व-अभिमान की बात हो रही है। जीवन लाल का यह मानना है कि उन्होंने अपनी बेटी गौरी की शादी में कोई भी कसर नहीं छोड़ी। पर्याप्त दहेज़ और समान देकर उन्होंने लड़के वालों का मुँह बंद कर दिया है।    
2.     अन्याय करने वाले के साथ अन्याय सहने वाला भी दोषी होता है क्योंकि इससे अन्यायी को शह मिलती है और वह दूसरों पर भी अन्याय करने लगता है। उदाहरण के तौर पर अगर एक मालिक अपने नौकर से दिन-रात काम करवाए और कम-से-कम वेतन दे तो यह भी अन्याय है जिसका प्रतिकार नौकर को अवश्य करना चाहिए।  
3.     एकांकी में कोष्ठक में लिखे गए संकेतों से वक्ता, श्रोता, स्थान, काल आदि की जानकारी मिल जाती है जिससे एकांकी को पूर्णत: समझने में मदद मिलती है।
4.     क्या होता यदि
क.   यदि रमेश बाबू घर पर होते तो जीवन लाल  और प्रमोद  के बीच हुए वार्तालाप आवेशपूर्ण न होते।
ख.   यदि राजेश्वरी कमला और प्रमोद का साथ न देती तो कमला की विदाई लगभग असंभव हो जाती।

ग.     यदि जीवन लाल की अपनी बेटी की विदाई हो गई होती तो उनका घमंड कभी भी चूर-चूर न होता और न ही राजेश्वरी की वाणी उनकी आँखें खोल पातीं।