Hindi Language Promotion and Development: Topi Shukla Rahi masoom Raza By Avinash Ranjan Gupta

Wednesday, 7 October 2015

Topi Shukla Rahi masoom Raza By Avinash Ranjan Gupta



बोधप्रश्न
1. इफ़्फ़न टोपी शुक्ला की कहानी का महत्त्वपूर्ण हिस्सा किस तरह से है?
2. इफ़्फ़न की दादी अपने पीहर क्यों जाना चाहती थीं?
3. इफ़्फ़न की दादी अपने बेटे की शादी में गानेबजाने की इच्छा पूरी क्यों नहीं कर पाईं?
4. ‘अम्मीशब्द पर टोपी के घरवालों की क्या प्रतिक्रिया हुई?
5. दस अक्तूबर सन् पैंतालीस का दिन टोपी के जीवन में क्या महत्त्व रखता है?
6. टोपी ने इफ़्फ़न से दादी बदलने की बात क्यों कही?
7. पूरे घर में इफ़्फ़न को अपनी दादी से ही विशेष स्नेह क्यों था?
8. इफ़्फ़न की दादी के देहांत के बाद टोपी को उसका घर खालीसा क्यों लगा?
9. टोपी और इफ़्फ़न की दादी अलगअलग मजहब और जाति के थे पर एक अनजान अटूट रिश्ते से बँधे थे। इस कथन के आलोक में अपने विचार लिखिए।
10. टोपी नवीं कक्षा में दो बार फ़ेल हो गया। बताइए -
(क) ज़हीन होने के बावजूद भी कक्षा में दो बार फ़ेल होने के क्या कारण थे?
(ख) एक ही कक्षा में दोदो बार बैठने से टोपी को किन भावात्मक चुनौतियों का सामना करना पड़ा?
(ग) टोपी की भावात्मक परेशानियों को मद्देनज़र रखते हुए शिक्षा व्यवस्था में आवश्यक बदलाव सुझाइए?
11. इफ़्फ़न की दादी के मायके का घर कस्टोडियन में क्यों चला गया?







1.    इफ्फ़न टोपी शुक्ला का पक्का दोस्त है। वह कहानी के मुख्य पात्रों में से एक है। यह कहानी प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से इफ्फ़न और टोपी के इर्द-गिर्द  ही घूमती रहती है। इफ्फ़न के बिना यह कहानी अधूरी है। अतः वह इस कहानी का महत्त्वपूर्ण हिस्सा है।
2.    इफ्फ़न की दादी एक जमींदार की बेटी थी। उसकी शादी एक मौलवी के साथ हुई थी। मौलवी के घर में दूध, दही और घी उन्हें उतनी नहीं  मिलती थी जितनी की बचपन के दिनों में वे अपने पीहर में खाया करती थीं। सच तो ये था कि अपने ससुराल में वो इन सब चीजों के लिए तरस गईं थीं  और इन सब चीजों का लुत्फ़ उठाने के लिए वो अपने पीहर जाना चाहती थीं।
3.    इफ्फ़न की दादी एक जमींदार की बेटी थी। उसकी शादी एक मौलवी के साथ हुई थी। मौलवी के घर में भला गाना-बजाना, नाच कैसे हो सकता था? अतः अपने बेटे की शादी में गानेबजाने की इच्छा पूरी नहीं हो सकी। वह दिल मसोसकर रह गई।
4.    जब टोपी के घरवालों ने खाने की मेज़ पर टोपी के मुँह से अम्मी शब्द सुना तो खाने की मेज़ पर बैठे सभी के हाथ रुक गए। वहाँ जीतने भी लोग थे उनकी आँखें टोपी के चेहरे पर जम गईं। टोपी से पूछा गया कि ये शब्द उसने कहाँ और किससे सीखा है? दादी ने भी उसे बहुत सुनाया और अंत में माता रामदुलारी ने टोपी को इतना मारा कि उसके सारे बदन में कई दिनों तक दर्द होता रहा।
5.    दस अक्तूबर सन् पैंतालीस का दिन टोपी के आत्म-इतिहास में एक विशेष महत्त्व रखता है। इसी दिन टोपी ने कसम खाई थी कि वह किसी ऐसे लड़के से दोस्ती नहीं करेगा जिसका बाप ऐसी नौकरी करता हो, जिसमें बदली होती रहती है। इसका कारण यह था कि इसी दिन उसका पक्का और एकमात्र दोस्त इफ्फ़न के पिता तबादले पर मुरादाबाद चले गए थे। इससे टोपी अकेला रह गया था।
6.    एक दिन टोपी ने  से कहा, “अय्यसा न हो सकता की हम लोग दादी बादल लें। तोहरी दादी हमरे घर आ जाए अउर हमरी तोहरे घर चली जाए।” टोपी को इफ्फ़न  की दादी बहुत अच्छी लगती थी। वह उन्हीं के पास बैठने की कोशिश करता था। उनकी बातें उसे बहुत प्यारी लगती थीं। अपनी दादी से उसे नफरत थी। इसलिए उसने इफ्फ़न से दादी बदलने की बात की।
7.    पूरे घर में इफ्फ़न को अपनी दादी से ही स्नेह था। घर के और लोग तो उसे कभी-कभार डाँट मार लिया करते थे। बड़ी और छोटी बहनें  भी उसे कभी-कभी परेशान किया करती थीं। पिताजी कभी-कभी घर को कचहरी समझ कर फैसला सुना दिया करते थे। एक दादी ही थी जिसने कभी भी उसका दिल नहीं दुखाया था। वही उसे बारह बुर्ज, बहराम डाकू, हातिम ताई , अमीर हमजा, पाँच फुल्ल रानी की कहानियाँ भी सुनाया करती थीं।
8.    टोपी को इफ्फ़न की दादी के देहांत के बाद भरा-पूरा-सा घर भी खाली लगने लगा क्योंकि उसे इफ्फ़न की दादी के पास बैठना बहुत अच्छा लगता था। टोपी को उनका हर शब्द शक्कर का खिलौना मालूम पड़ता था। वह उसका हाल-चाल पूछा करती थीं। दादी और उसमें एक विशेष किस्म का संबंध स्थापित हो चुका था। और दोनों में सबसे बड़ी समानता यह थी की दोनों अपने भरे पूरे-घर में अकलेपन के शिकार बन चुके थे।
9.    टोपी और इफ्फ़न की दादी अलग-अलग मज़हब और जाति के थे- एक हिन्दू और दूसरा  कट्टर मुसलमान। इसके बावजूद दोनों अटूट रिश्ते में बँधे थे। दोनों के बीच गहरा लगाव था। हालाँकि, टोपी को इफ्फ़न की दादी का नाम तक मालूम नहीं था। उसने दादी के हज़ार कहने के बावजूद भी उनके हाथ की कोई चीज़ नहीं खाई थी। पर प्रेम इन बातों का पाबंद नहीं होता है। दोनों ने एक दूसरे के अकेलेपन को दूर कर दिया था। इससे एक बात तो स्पष्ट हो जाती है कि दिल का रिश्ता किसी भी परंपरा या धार्मिक नीति नियमों को नहीं मानता है।
10.                       
1. टोपी ज़हीन अर्थात् बुद्धिमान होने के बावजूद कक्षा में दो बार इसलिए फेल हो गया क्योंकि जब वह पढ़ने बैठता तभी उसके माँ उसे कुछ काम बता देती और कभी तो उसका छोटा भाई भैरव उसकी किताबों के रॉकेट ही बना कर उड़ा डालता। दूसरे साल तो उसे टाइफाइड हो गया था।
2. एक ही कक्षा में दो बार बैठने पर टोपी को अनेक भावात्मक चुनौतियों का सामना करना पड़ा उसके सहपाठी उसकी हँसी उड़ाते थे। मास्टरजी कमजोर लड़कों को उसका उदाहरण देकर व्यंग्य करते थे।
अगले साल तो वह जिल्लत के मारे मिट्टी का लौंदा ही हो गया। 
मास्टरों ने उसका नोटिस लेना बंद ही कर दिया
जब वह किसी सवाल का जवाब देने के लिए बार-बार हाथ उठाता तो मास्टर साहब कहते- तीन बरस से यही किताब पढ़ रहे हो , तुम्हें तो सारे जवाब जबानी याद हो गए होंगे। इन लड़कों को अगले साल है स्कूल का इम्तहान  देना है। तुमसे परसाल पूछ लेंगे। 
3. टोपी की भावात्मक परेशानियों को देखते हुए हमें शिक्षा व्यवस्था  में काफी बदलाव लाने की  आवश्यकता है और आवश्यक  बदलाव हुए भी हैं, जैसे अब ग्रेडिंग सिस्टम कर दिया गया है जिससे कोई भी छात्र फेल न होकर अगली कक्षा में चढ़ा दिया जाता है साथ ही साथ शिक्षकों के व्यवहार में भी सकारात्मक बदलावों की  नितांत  आवश्यकता है।

11.                      STUDENTS SHOULD ANSWER THIS